
अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले में सियांग नदी की बाढ़ और लगातार हो रहे भूमि कटाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मेबो उपमंडल के बोर्गुली गांव के कोंगकिन इलाके में नदी के कटाव से धान के खेतों समेत दूसरी कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है. इससे खेती पर निर्भर परिवारों की आजीविका पर संकट गहराने लगा है. स्थिति की जानकारी मिलने के बाद बुधवार को ईस्ट सियांग जिले के एडीसी और प्रभारी उपायुक्त टैटलिंग पर्टिन ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया. उनके साथ मेबो की एडीसी नैन्सी यिरांग, नामसिंग के सीओ तोइमी तागी, जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता बनी लांगकम, मोंग्गु बांग्गो-I के जेडपीएम बापियांग तायेंग और बोर्गुली गांव के गांव बुड़ाह भी मौजूद रहे. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर नदी के कटाव और कृषि भूमि को हुए नुकसान का आकलन किया.
इंडियाटुडे नॉथईस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान किसान ओटिल तायेंग के वेट राइस कल्टिवेशन यानी डब्ल्यूआरसी खेतों का भी जायजा लिया गया. इन खेतों में धान की फसल खड़ी थी, लेकिन नदी के कटाव से खेत का कुछ हिस्सा पहले ही बह चुका है. आसपास के अन्य किसानों की कृषि भूमि पर भी कटाव का खतरा बना हुआ है.
प्रभावित किसानों के मुताबिक, वर्ष 2021 से सियांग नदी में आने वाली बार-बार की बाढ़ और नदी की बदलती धारा के कारण इलाके में बड़े पैमाने पर जमीन का कटाव हो रहा है. इस दौरान नकदी फसलों के बागान, बांस के झुरमुट और उपजाऊ कृषि भूमि का काफी हिस्सा नदी में समा चुका है. अब कटाव का असर उन खेतों पर भी पड़ रहा है, जहां धान की फसल तैयार खड़ी है.
बोर्गुली और आसपास के गांवों के किसानों के लिए धान की खेती भोजन और आमदनी का प्रमुख साधन है. यह इलाका अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में शामिल माना जाता है. ऐसे में खेतों और खड़ी फसल के नुकसान से खेती पर निर्भर परिवारों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं.
निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान की जानकारी जुटाई है. अब पूरे नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार कर संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भेजे जाने की उम्मीद है. इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
प्रभावित ग्रामीणों ने राज्य और केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है. किसानों ने फसल और जमीन के नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है. साथ ही उन्होंने बाढ़ नियंत्रण और नदी के कटाव से बचाव के लिए स्थायी उपाय किए जाने पर जोर दिया है, ताकि कृषि भूमि, खड़ी फसलों और अन्य संपत्तियों को आगे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके.