DBW 443 (करण सान्वी): आयरन-जिंक से भरपूर नई गेहूं किस्म, 77 क्विंटल/हेक्टेयर तक देती है पैदावार

DBW 443 (करण सान्वी): आयरन-जिंक से भरपूर नई गेहूं किस्म, 77 क्विंटल/हेक्टेयर तक देती है पैदावार

आईसीएआर-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) द्वारा विकसित नई जैव-संपोषित गेहूं किस्म DBW 443 (करण सान्वी) किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और पोषण का नया विकल्प बनकर उभरी है. इस किस्म में 13 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन, 41.9 पीपीएम आयरन और 43 पीपीएम जिंक पाया गया है. इसके अलावा यह पत्ती और तना रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी है और 77.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन क्षमता रखती है. वर्ष 2024 में अखिल भारतीय समन्वित गेहूं एवं जौ अनुसंधान परियोजना की बैठक में इस किस्म की पहचान की गई थी.

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  • New Delhi,
  • Sep 17, 2026,
  • Updated Sep 17, 2026, 4:08 PM IST

देश में कुपोषण और छिपी भूख (हिडन हंगर) जैसी चुनौतियों के बीच वैज्ञानिकों ने ऐसी गेहूं किस्म विकसित की है जो न केवल अच्छी पैदावार देती है बल्कि पोषण के मामले में भी पारंपरिक किस्मों से आगे है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), करनाल द्वारा विकसित गेहूं की नई बायो फोर्टिफाइड किस्म DBW 443 (करण सान्वी) किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए उम्मीद लेकर आई है.

यह किस्म विशेष रूप से उच्च प्रोटीन, आयरन और जिंक की उपलब्धता के लिए विकसित की गई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किस्म कृषि उत्पादन और पोषण सुरक्षा, दोनों लक्ष्यों को एक साथ पूरा करने की क्षमता रखती है.

तीन साल के परीक्षण के बाद मिली पहचान

DBW 443 को पहले क्वालिटी कंपोनेंट और व्हीट बायोफोर्टिफिकेशन नर्सरी में देश के 18 केंद्रों पर परखा गया. परीक्षणों में इस किस्म ने उपज, पोषण और रोग प्रतिरोधकता के मामले में बहुत अच्छा रिजल्ट दिया. इसके बाद इसे प्रायद्वीपीय क्षेत्र (Peninsular Zone) के लिए एडवांस्ड वैरायटी ट्रायल (AVT) में शामिल किया गया.

परीक्षणों के दौरान इस किस्म ने औसतन 50 से 51 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज दर्ज की. साथ ही इसमें 13 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन, 40 पीपीएम से ज्यादा आयरन और 43 पीपीएम तक जिंक पाया गया. लगातार बेहतर प्रदर्शन के आधार पर इसे अगले चरणों में प्रमोट किया गया.

अंततः सितंबर 2024 में अयोध्या में आयोजित ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (AICRP) ऑन व्हीट एंड बार्ले की 63वीं वार्षिक बैठक में DBW 443 की पहचान नई किस्म के रूप में की गई.

पोषण से भरपूर गेहूं

करण सान्वी की सबसे बड़ी विशेषता इसका पोषण स्तर है. इस किस्म में

  • प्रोटीन: 13.4 प्रतिशत तक
  • आयरन (Fe): 41.9 पीपीएम
  • जिंक (Zn): 43.0 पीपीएम मौजूद है.

मौजूदा समय में आयरन और जिंक की कमी देश में बड़ी पोषण चुनौती मानी जाती है. ऐसे में जैव-संपोषित गेहूं की यह किस्म लोगों के भोजन में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकती है.

पैदावार भी दमदार

वैज्ञानिकों के अनुसार DBW 443 की संभावित उत्पादन क्षमता 77.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. इसके दानों का आकार भी बड़ा है और एक हजार दानों का वजन लगभग 45 ग्राम दर्ज किया गया है. यही वजह है कि इसे उच्च उत्पादकता वाली किस्मों में गिना जा रहा है.

रतुआ रोग के लिए प्रतिरोधी

गेहूं की खेती में पत्ती रतुआ (Leaf Rust) और तना रतुआ (Stem Rust) सबसे गंभीर बीमारियों में शामिल हैं. परीक्षणों में DBW 443 इन दोनों रोगों के प्रति प्रतिरोधी पाई गई. प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों परिस्थितियों में इस किस्म ने संक्रमण का कम स्तर दिखाया. इससे किसानों को फसल सुरक्षा पर अतिरिक्त खर्च कम करने में मदद मिल सकती है.

कैसी दिखती है यह किस्म?

DBW 443 के पौधों में गहरा हरा रंग और आधा-सीधा (Semi-Erect) तनों का आकार देखा जाता है. इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं

  • गहरे हरे रंग की पत्तियां
  • लंबी और घनी बालियां
  • मोमी (Waxy) पेडुनकल और स्पाइक
  • पकने पर सफेद रंग की बाली
  • फैलावदार ऑन्स (Awns)
  • एंबर रंग के चमकदार दाने
  • आधा-कठोर बनावट के दाने

यह किस्म लगभग 89 सेंटीमीटर ऊंची होती है. इसमें 63 दिन में फूल आते हैं और करीब 109 दिनों में फसल पककर तैयार हो जाती है.

जलवायु चुनौतियों के बीच बेहतर विकल्प

उपलब्ध जानकारी के अनुसार DBW 443 में गर्मी और सूखे को सहन करने की क्षमता भी है. यही कारण है कि इसे बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप गेहूं उत्पादन के लिए एक उपयोगी विकल्प माना जा रहा है. साथ ही यह स्थिर और टिकाऊ उत्पादन देने की क्षमता भी रखती है.

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है DBW 443?

विशेषज्ञों के मुताबिक यह किस्म किसानों को तीन बड़े फायदे दे सकती है

  • अधिक और स्थिर उत्पादन
  • रोगों के कारण होने वाले नुकसान में कमी
  • पोषणयुक्त गेहूं के कारण बेहतर बाजार संभावनाएं

कुल मिलाकर DBW 443 (करण सान्वी) ऐसी नई पीढ़ी की गेहूं किस्म है जो उत्पादन, पोषण और रोग प्रतिरोधकता का संतुलित मेल पेश करती है. गेहूं उत्पादन के साथ-साथ देश की पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

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