
पूर्वांचल पानी बिना रोए, बुंदेलखंड पानी-पानी होए. यह कहावत मौजूदा मॉनसून की बारिश पर बिल्कुल फिट बैठती है. दरअसल, पूर्वांचल जिसे धान का कटोरा कहा जाता है, वहां बारिश बहुत कम है जिससे धान की फसल चौपट हो रही है. दूसरी ओर, बुंदेलखंड जिसे दालों का कटोरा कहा जाता है, वहां अधिक बारिश होने से दलहन की फसलें तबाह हो रही हैं. इससे पता चलता है कि इस बार अल नीनो ने बारिश के पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है. जहां अधिक बारिश की जरूरत है, वहां न के बराबर है जबकि जहां कम बारिश चाहिए, वहां पानी ही पानी है.
बुंदेलखंड का इलाका दलहन फसल की खेती के लिए प्रधान माना जाता है. इसे दलहन का कटोरा भी कहते हैं. इसमें भी हमीरपुर का पूरा इलाका दालों की खेती के लिए सबसे प्रमुख है. यहां बारिश कम होती है जिसका असर सिंचाई पर देखा जाता है. सिंचाई सुविधा के अभाव में किसान दालों की खेती को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि दलहन कम बारिश में भी अच्छा मुनाफा दे जाती है. लेकिन इस बार किसानों के सामने बड़ा संकट है. यह संकट है अधिक बारिश का.
बुंदेलखंड में इस बार बहुत बारिश हो रही है जिससे दलहन की फसलें मारी जा रही हैं. ताजा अपडेट की बात करें तो लखनऊ के रीजनल मौसम केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट अतुल कुमार सिंह ने कहा, "उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तट पर कम दबाव का क्षेत्र बनने और उत्तर-पश्चिम पंजाब और उससे सटे जम्मू-कश्मीर में साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) के रूप में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण उत्तर प्रदेश में मॉनसून की गतिविधि काफी बढ़ने की संभावना है. पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. इसके बाद, जैसे-जैसे कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ेगा, बारिश का केंद्र धीरे-धीरे दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र की ओर बढ़ने की उम्मीद है."
बुंदेलखंड में बढ़ती बारिश का पैटर्न केवल इसी साल की गतिविधि नहीं है बल्कि बीते कुछ वर्षों से ऐसा ही देखा जा रहा है. पिछले साल का आंकड़ा देखें तो पता चलेगा कि मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ और निवाड़ी (बुंदेलखंड का इलाका) में क्रमशः 212% और 315% अधिक बारिश दर्ज की गई. ललितपुर के सभी 14 बांध अपनी पूरी क्षमता तक भरे हुए थे और उसे कम करने के लिए पानी छोड़ा गया.
जरूरत से अधिक बारिश होने की वजह से मूंगफली, तिल, मूंग और उड़द जैसी खरीफ की फसलें बर्बाद हो गईं. यहां तक कि लगातार बारिश से बाढ़ आ गई, घर गिर गए और सड़कें बंद हो गईं. विशेषज्ञों ने बेमौसम बारिश के इस पैटर्न को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा और आने वाले समय में इसका प्रभाव और बढ़ने की आशंका जाहिर की.
दूसरी ओर बिहार और उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका है जहां बारिश की घोर कमी है. इस इलाके को धनहर यानी धान प्रधान क्षेत्र कहा जाता है. धान की खेती के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, खासकर बारिश की. लेकिन इस बार भी पूर्वांचल में सूखे की आहट है. बारिश की कमी से धान के पौधे पीले हो रहे हैं, सूख कर मुरझा रहे हैं. मॉनसून के शुरुआती दिनों में कुछ बारिश हुई थी, लेकिन अभी धान के बढ़वार के समय बारिश न के बराबर है.
धान के इस नाजुक समय में अगर पर्याप्त पानी नहीं मिले तो फसल चौपट हो जाएगी. धान के दो सबसे प्रमुख स्टेज होते हैं-शुरुआती बढ़वार और मिल्किंग स्टेज. शुरुआती बढ़वार का अभी समय है जब खेतों में पौधों को अधिक पानी चाहिए. यहां तक कि आधा पौधा पानी में डूबा हो तो भी कोई नुकसान नहीं. मगर अभी सिंचाई की कमी से खेतों में दरार आ गई है.
पूर्वांचल के किसान बारिश के इंतजार में धान की फसल को ट्यूबवेल और पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे हैं. हालांकि यह तरीका बहुत अधिक कारगर नहीं है क्योंकि ट्यूबवेल या पंपिंग सेट का पानी बारिश के पानी की तरह फायदा नहीं देता. किसान का खर्च भी बढ़ जाता है क्योंकि डीजल की महंगाई बहुत अधिक है.
बुंदेलखंड और पूर्वांचल में बारिश का गड़बड़ पैटर्न जानने के लिए यह आंकड़ा देख सकते हैं. महोबा में सामान्य से लगभग तीन गुना ज्यादा बारिश हुई—वहां 673.7 mm बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 199% अधिक है. बांदा और चित्रकूट में क्रमशः 646 mm और 632.9 mm बारिश हुई—दोनों ही जगहों पर बारिश सामान्य से 140% से अधिक रही.
वहीं दूसरी तरफ, देवरिया में सिर्फ 42.5 mm बारिश हुई, जो सामान्य से 81% कम है. कुशीनगर में 54 mm बारिश दर्ज की गई (सामान्य से 74% कम), जबकि मऊ में 89.5 mm बारिश हुई (सामान्य से 60% कम). लखनऊ के रीजनल मौसम केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट अतुल कुमार सिंह ने कहा, "पश्चिमी यूपी में पूर्वी यूपी के मुकाबले महीने भर में अधिक बारिश हुई. इस इलाके में 294 mm बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 228.3 mm थी—यानी 29% अधिक बारिश हुई."
बुंदेलखंड और पूर्वांचल में मॉनसून की बेईमानी का असर दलहन और धान जैसी फसलों पर साफ-साफ देखा जा रहा है. बुंदेलखंड में अधिक बारिश से दलहन मारी जा रही है जबकि पूर्वांचल में कम बारिश से धान सूखा जा रहा है.