Onion Price Hike: गोदामों में सड़ता लाखों टन प्याज, कब तक चलेगी बर्बादी और महंगाई की ये जुगलबंदी?

Onion Price Hike: गोदामों में सड़ता लाखों टन प्याज, कब तक चलेगी बर्बादी और महंगाई की ये जुगलबंदी?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उगाने वाला देश है. हर साल यहां 300 लाख टन प्याज पैदा होता है. लेकिन कड़वा सच यह है कि 30 से 40 फीसदी फसल सड़कर कचरा बन जाती है. इस भयानक बर्बादी से किसानों की खून-पसीने की कमाई मिट्टी में मिल जाती है.

Onion Crisis: Millions of Tonnes Rotting While Prices SoarOnion Crisis: Millions of Tonnes Rotting While Prices Soar
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Aug 30, 2026,
  • Updated Aug 30, 2026, 12:06 PM IST

देश की रसोई का जायका प्याज के बिना अधूरी है.गरीब की सूखी रोटी हो या किसी रईस के घर पर सजा शाही पकवान,यह हर थाली का एक बेहद बुनियादी हिस्सा है.देश में प्याज की खेती साल भर होती है, जिसका 60 फीसदी उत्पादन रबी की फसल से और बाकी 40  फीसदी दूसरे मौसमों से हासिल होता है. अमूमन मार्च से लेकर जून के दरमियान रबी का प्याज खेतों से तैयार होकर बाजार में आता  है. जब तक खरीफ की नई फसल  अक्टूबर-नवंबर तक नही आ जाती तब तक रबी की प्याज ही देश की मांग को पूरी करती है.

सरकारी आंकड़ों पर गौर करें, तो साल 2025-26 में देश का कुल प्याज उत्पादन तकरीबन 307.37 लाख मीट्रिक टन के शानदार मुकाम पर रहा है . देश में रोजाना तकरीबन पचास हजार टन की खपत के अनुसार हमें सालाना 182.50 लाख मीट्रिक टन प्याज की जरूरत होती है. एपीडा की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी दौरान 15 लाख टन प्याज का निर्यात भी किया गया. हमारी कुल 197.50 लाख टन की जरूरत के मुकाबले देश में पैदावार कहीं ज्यादा भरपूर थी. लेकिन बंपर पैदावार के बावजूद प्याज के महंगा होने की असली वजह वह दर्दनाक कुल उत्पादन की एक तिहाई बर्बादी है, जो खेतों से खुदाई के बाद गोदामों और मंडियों तक पहुंचने के सफर में होती है.

बंपर पैदावार, फिर भी हाहाकार

चीन के बाद भारत  दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है. हमारे किसान सालाना 300 लाख टन से ज्यादा प्याज उपजाते हैं. लेकिन इन खुशनुमा आंकड़ों की हकीकत बेहद दर्दनाक है. विशेषज्ञो के मुताबिक, कुल पैदावार का 30 से 40 फीसदी हिस्सा करीब 90 से 100 लाख टन सड़कर कचरे में तब्दील हो जाता है. इतनी बड़ी तादाद में उपज तबाह होने से किसानों की हाड़तोड़ मेहनत और हजारों की लागत मिट्टी में मिल जाती है, जिससे किसानो की आंखों में बेबसी के आंसू आ जाते हैं. इसी बर्बादी से बाजार में बनावटी कमी पैदा होती है और देश को महंगाई की मार झेलनी पड़ती है.नतीजतन, देश की कृषि अर्थव्यवस्था को सालाना तकरीबन ग्यारह हजार करोड़ रुपये का भारी माली नुकसान उठाना पड़ता है.

इस बर्बादी का दर्दनाक मंजर महाराष्ट्र और गुजरात जैसे सूबों में दिखता है, जिन्हें प्याज पैदावार का अहम केन्द्र माना जाता है. खेत में प्याज खुदाई के वक्त कुदाल की मामूली खरोंच से बर्बादी का जो सिलसिला शुरू होता है, वह मंडियों तक लगाताार जारी रहता है. इस साल बेमौसम बारिश ने हालात और खराब बना दिए. खेतो जलभराव से क्वालिटी खराब हुई। जल्दबाजी में नमी वाले प्याज का भंडारण करने से अंदरूनी सड़न और फफूंद स्टॉक में महामारी की तरह फैल गई.

मेहनत सड़ रही ,किल्तत बढ़ रही

इस भारी राष्ट्रीय नुकसान की मुख्य वजह स्टोरेज व्यवस्था का खस्ताहाल होना है. देश में कुल जरूरत के मुकाबले कोल्ड स्टोरेज की सुविधा महज 10 फीसदी है. बाकी नब्बे फीसदी से ज्यादा प्याज आज भी किसानों और व्यापारियों द्वारा पुराने बांस या टीन के शेड में रखा जाता है.बेहतर स्टोरेज सुविधाओं के अभाव में यह फसल मौसम की बेरहम मार झेलने को मजबूर है.

इस समस्या की तह तक जाने के लिए सीआईएआर और आईसीएआर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने जमीनी स्तर पर गहरा शोध किया है.उनके मुताबिक, ऐसी गैर-वैज्ञानिक प्रणाली में महज चार महीने के भीतर आधी से ज्यादा फसल बर्बाद हो जाती है.दरअसल, जब पुराने गोदामों में हवा के सुचारू प्रवाह का उचित इंतजाम नहीं होता,तो अंदर उमस बेतहाशा बढ़ जाती है.नतीजतन, सड़न,वजन में कमी और फंगस जैसी खतरनाक दिक्कतों के चलते प्याज क्वालिटी खराब हो जाती हैऔर बाजार में बिकने लायक नहीं बचती. जिससे स्टॉक तेजी से घटता है और मंडियों में भारी किल्लत पैदा होती है.

कब तक चलेगी ये बर्बादी ?

मसले की जड़ तक पहुंचने के बावजूद हम इस नुकसान को रोकने में नाकाम हैं. इसकी बड़ी वजह देश में बेहतर कोल्ड स्टोरेज की भारी कमी है. छोटे और सीमांत किसानों की माली हालत इतनी खस्ता है कि वे नई तकनीक या महंगे कोल्ड स्टोरेज का खर्च चाहकर भी नहीं उठा सकते. आज भी ज्यादातर किसान कच्चे छप्परों में कमाई रखने को बेबस हैं.वही बदलते मौसम के सामने प्याज सुरक्षित स्टोर करने के देसी तरीके पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं.

इसके साथ ही,फूड प्रोसेसिंग सुविधाओं का जमीनी सतह पर न के बराबर होना एक गंभीर चुनौती है.अगर मौसम मेहरबान रहे और बंपर पैदावार हो जाए, तो प्याज को खराब होने से पहले पाउडर या पेस्ट में तब्दील करने वाले कारखाने किसानों की पहुंच से कोसों दूर हैं. देश में आज तक कोई पुख्ता सप्लाई चेन नहीं बन पाई है,जो सरप्लस उपज को फौरन प्रोसेस करके सुरक्षित रख सके. इसी लचर व्यवस्था के कारण किसान अपनी गाढ़ी कमाई आंखों के सामने सड़ते देखने को मजबूर है.

सड़ता प्याज, रोता किसान

प्याज की खुदाई  के बाद होने वाली इस बर्बादी का सीधा और दर्दनाक असर किसानों की जेब पर पड़ता है. महंगे बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरों पर पूंजी लगाने के बाद किसान उम्मीद करता है कि उसे मेहनत का वाजिब दाम मिलेगा. मगर वह अपनी साफ-सुथरी फसल मंडी ले जाने का हसीन ख्वाब ही देखता रह जाता है.जब चालीस फीसदी उपज महज मिट्टी में मिल जाती है, तो उसकी मूल लागत तक वापस नहीं लौट पाती और आंखों में बेबसी के आंसू छलक आते हैं.

इसी बदहाली और लगातार घाटे के चलते किसान कर्ज के ऐसे गहरे दलदल में धंसता है, जिससे बाहर निकलना तकरीबन नामुमकिन हो जाता है.दूसरी तरफ, देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है. घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए सरकार को कीमती विदेशी मुद्रा खर्च करके दूसरे देशों से प्याज आयात करना पड़ता है. दुनिया का दूसरा बड़ा उत्पादक होने के बावजूद यह मजबूरी कृषि नीतियों की शर्मनाक नाकामी को जाहिर करती है.

रसोई की बजट पर मार

फसल की इस खौफनाक बर्बादी का अजाब सिर्फ किसानों की दहलीज तक ही नहीं रहता, बल्कि यह आम उपभोक्ता की रसोई का पूरा बजट भी तहस-नहस कर देता है.बारिश के मौसम या ऑफ-सीजन में जब बड़े पैमाने पर स्टॉक खराब होने से भारी किल्लत पैदा होती है, तो कीमतें आसमान छूने लगती हैं.बंपर पैदावार के बावजूद बाजार में प्याज की उपलब्धता घटने से कीमतों पर भारी दबाव बनता है और हाहाकार मच जाता है.

नतीजतन,आम जनता को वही प्याज मजबूरी में 80 से 100 रुपये किलो के दाम पर खरीदना पड़ता है,जो सीजन में कौड़ियों के भाव बिका था.इस बनावट कमी का नाजायज फायदा सीधे बिचौलिए उठाते हैं.अब वक्त आ गया है कि हुकूमत और नीतिकार गंभीरता से स्मार्ट स्टोरेज, सेंसर वाले गोदामों और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का जाल बिछाएं. इस नुकसान को 10 से 15फीसदी तक लाने से ही किसानों के चेहरे पर खुशहाली लौटेगी और महंगाई से हमेशा के लिए निजात मिलेगी.

MORE NEWS

Read more!