जम्मू-कश्मीर में अखरोट की तुड़ाई शुरू, 3000 परिवारों की आजीविका का सहारा बनी खेती

जम्मू-कश्मीर में अखरोट की तुड़ाई शुरू, 3000 परिवारों की आजीविका का सहारा बनी खेती

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बानी के पहाड़ी इलाकों में अखरोट की तुड़ाई का मौसम शुरू हो गया है. किसान परिवार पेड़ों से पके अखरोट तोड़कर उन्हें साफ करने और धूप में सुखाने में जुटे हैं.

अखरोट की तुड़ाई शुरूअखरोट की तुड़ाई शुरू
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 30, 2026,
  • Updated Aug 30, 2026, 2:21 PM IST

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के पहाड़ी इलाके बानी में इन दिनों अखरोट की तुड़ाई का मौसम चल रहा है. बानी के गांवों में किसान और उनके परिवार अखरोट के बागों में दिनभर मेहनत कर पके हुए अखरोट पेड़ों से तोड़ रहे हैं. यहां अखरोट की खेती लंबे समय से किसानों की आमदनी का एक अहम जरिया रही है. किसान पारंपरिक तरीके से अखरोट उगाते हैं और इसे प्राकृतिक खेती से जुड़ा उत्पाद भी मानते हैं. अखरोट तोड़ने के बाद किसान उन्हें साफ करते हैं. इसके बाद बाजार में भेजने से पहले अखरोट को करीब 5 से 6 दिनों तक धूप में सुखाया जाता है. अच्छी तरह सूखने के बाद इन्हें बाजार में बेचने के लिए भेजा जाता है. किसानों का कहना है कि अखरोट उनके लिए सिर्फ एक फसल नहीं है, बल्कि पूरे साल की मेहनत का नतीजा है.

100 अखरोट के पेड़ों से हजारों फलों का उत्पादन

बानी के किसान मदन लाल करीब 30 साल से बागवानी का काम कर रहे हैं. उनके पास अखरोट के करीब 100 पेड़ हैं. इनमें मुख्य रूप से 'हमदान' और 'सुलेमान' किस्म के पेड़ शामिल हैं. मदन लाल के मुताबिक, अच्छी फसल होने पर उनके बाग में करीब 50,000 अखरोट तक का उत्पादन हो जाता है. उन्होंने बताया कि अखरोट की खेती लंबे समय से उनके परिवार की आय का एक महत्वपूर्ण साधन रही है. खेती और बागवानी से जुड़े किसानों के लिए पेड़ों की देखभाल पूरे साल चलती रहती है, इसलिए जब अखरोट पककर तैयार होते हैं और तुड़ाई शुरू होती है तो किसानों को अपनी मेहनत का फल मिलने की खुशी होती है.

मदन लाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किसानों और बागवानी को लेकर कही जाने वाली बातों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 'मन की बात' जैसे कार्यक्रमों में किसानों और बागवानी से जुड़े विषयों पर चर्चा से उन्हें काफी प्रेरणा मिलती है.

अखरोट की तुड़ाई का पूरे साल रहता है इंतजार

एक अन्य किसान आदिल ने बताया कि किसान पूरे साल अखरोट की फसल तैयार होने का इंतजार करते हैं, जब पेड़ों पर अखरोट पक जाते हैं तो उनकी तुड़ाई शुरू की जाती है. इसके बाद अखरोट की सफाई और सुखाने का काम होता है. आदिल के मुताबिक, अखरोट को करीब पांच से छह दिनों तक धूप में सुखाने के बाद बाजार में बेचने के लिए तैयार किया जाता है.  उन्होंने कहा कि जब वह अपने पेड़ों के नीचे खड़े होकर तैयार फसल को देखते हैं तो उन्हें काफी खुशी और संतुष्टि मिलती है.

 

3,000 परिवार अखरोट की खेती पर निर्भर

जिला बागवानी अधिकारी मोहम्मद शकील के मुताबिक, कठुआ के बानी क्षेत्र में करीब 3,000 परिवार अखरोट के उत्पादन से जुड़े हुए हैं. इन परिवारों की आजीविका काफी हद तक अखरोट की खेती पर निर्भर करती है. उन्होंने बताया कि बाजार में एक अखरोट करीब 3 रुपये में बिक सकता है. हालांकि, अखरोट के पेड़ को पूरी तरह विकसित होने और फल देने की स्थिति में पहुंचने में काफी समय लगता है, जब कोई पेड़ पूरी तरह फल देने लगता है तो एक सीजन में उससे करीब 15,000 से 20,000 रुपये तक की कमाई हो सकती है.

'चैंडलर' किस्म पर विभाग का जोर

बागवानी विभाग बानी क्षेत्र में अखरोट की खेती को और बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है. अधिकारी ने बताया कि विभाग पिछले दो वर्षों से 'चैंडलर' अखरोट की किस्म पर काम कर रहा है. इसे बेहतर क्वालिटी वाली किस्म बताया जा रहा है और आने वाले समय में इससे किसानों को अच्छी संभावनाएं मिलने की उम्मीद है. अधिकारी के मुताबिक, अगर किसानों को बेहतर किस्म के पौधे, तकनीकी जानकारी और बाजार की अच्छी सुविधा मिले तो बानी में अखरोट की खेती को और बढ़ाया जा सकता है. इससे क्षेत्र के हजारों परिवारों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.

ऐसे में बानी के पहाड़ी इलाकों में अखरोट की तुड़ाई सिर्फ एक मौसमी गतिविधि नहीं है. ये यहां के हजारों किसानों और परिवारों की आमदनी, मेहनत और बागवानी की परंपरा से जुड़ी हुई है. अच्छी किस्मों और बेहतर बाजार व्यवस्था के साथ आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में अखरोट उत्पादन की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं. (ANI)

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