Monsoon 2026: 17 साल में सबसे कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, खरीफ फसलों पर बढ़ी चिंता

Monsoon 2026: 17 साल में सबसे कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, खरीफ फसलों पर बढ़ी चिंता

देश में मॉनसून सीजन के लगभग तीन महीने पूरे होने के बाद बारिश में 13 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. 2009 के बाद यह सबसे कमजोर मॉनसून साबित हो सकता है. अल नीनो के असर और कई राज्यों में कम बारिश के चलते खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.

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Monsoon 2026: 17 साल में सबसे कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, खरीफ फसलों पर बढ़ी चिंताभारत में मॉनसून की बारिश में भारी कमी

देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन (जून से सितंबर) के लगभग तीन महीने गुजर चुके हैं, लेकिन बारिश अब भी सामान्य से काफी कम बनी हुई है. मौजूदा स्थिति को देखते हुए वर्ष 2026 का मॉनसून 2009 के बाद सबसे कमजोर मॉनसून सीजन साबित हो सकता है.

मौसम आंकड़ों के अनुसार 27 अगस्त 2026 तक देश में कुल बारिश सामान्य स्तर (Long Period Average) से करीब 13 फीसदी कम रही है. अगर सितंबर में बारिश में बहुत अच्छा सुधार नहीं होता है तो पूरे सीजन की बारिश "डिफिशिएंट" यानी सामान्य से 10 फीसदी से अधिक कम रह सकती है.

सितंबर की बारिश होगी बेहद अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून के अंतिम महीने सितंबर का प्रदर्शन पूरे सीजन की तस्वीर तय करेगा. खासकर दलहन, तिलहन और देर से बोई गई खरीफ फसलों के लिए सितंबर की बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

इस साल प्रशांत महासागर में एक्टिव हो रही अल नीनो (El Niño) स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है. आमतौर पर अल नीनो के दौरान भारत में मॉनसून कमजोर रहने की आशंका अधिक होती है.

अगस्त में भी नहीं मिली राहत

अगस्त महीने में भी बारिश की कमी बनी रही. अब तक अगस्त की बारिश सामान्य से करीब 14 फीसदी कम दर्ज की गई है. इससे कई इलाकों में मिट्टी की नमी घट रही है और फसलों के विकास पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है.

कृषि क्षेत्र पर नजर रखने वाली एजेंसी इक्रा (ICRA) का अनुमान है कि 2026 में खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले 1 से 2 फीसदी तक घट सकता है. पिछले साल खरीफ बुवाई का क्षेत्रफल 112.1 मिलियन हेक्टेयर था.

किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कमी?

देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है. मध्य भारत में सामान्य के करीब बारिश हुई है और वहां केवल 1.8% कमी दर्ज की गई है. उत्तर-पश्चिम भारत में 10.6% बारिश की कमी है जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में यह कमी बढ़कर 26.8% तक पहुंच गई है. दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 22.1% बारिश की कमी है.

इससे स्पष्ट है कि मध्य भारत को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा असर

देश के कई प्रमुख कृषि राज्यों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. इसमें बिहार -42%, आंध्र प्रदेश -39%, पंजाब -34%, कर्नाटक: -22%, राजस्थान -21% और केरल -20% के नाम शामिल हैं.

बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भारी बारिश घाटा किसानों की चिंता बढ़ा रहा है. इन राज्यों में धान, दलहन और अन्य खरीफ फसलों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

फसल उत्पादन पर पड़ सकता है असर

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कई क्षेत्रों में बारिश रुक-रुक कर हुई है, जिससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई. यदि सितंबर में भी अच्छी बारिश नहीं होती है तो दलहन, तिलहन समेत कई खरीफ फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है.

हालांकि, मध्य भारत में पहले से कुछ बेहतर बारिश होने से सोयाबीन और कुछ अन्य फसलों को राहत मिली है, लेकिन पूर्वी और दक्षिणी राज्यों की स्थिति अब भी चिंता का कारण बनी हुई है.

क्या है आगे की चुनौती?

अब पूरे देश की नजर सितंबर की बारिश पर है. यदि मॉनसून अंतिम चरण में जोर पकड़ता है तो फसलों को कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन बारिश की कमी जारी रहने पर उत्पादन, ग्रामीण आय और खाद्य कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है. किसानों के लिए अगले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं.

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