
हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों से जुड़ी एक बड़ी मांग सामने आई है. हिमाचल एप्पल ग्रोअर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से अपील की है कि मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत किसानों से खरीदे गए सेब और दूसरे फलों का बकाया भुगतान जल्द से जल्द किया जाए. एसोसिएशन का कहना है कि कई किसानों ने भुगतान के लिए जरूरी सभी कागजी प्रक्रिया पूरी कर दी है, लेकिन इसके बावजूद उनके खातों में अभी तक पैसे नहीं पहुंचे हैं.
एसोसिएशन की राज्य समिति के सदस्य संजय चौहान ने रविवार को जारी बयान में कहा कि सरकार ने मार्च में MIS के तहत खरीदी गई उपज का भुगतान शुरू किया था. शुरुआत में उन किसानों को भुगतान करने की बात कही गई थी, जिन्होंने 30 बैग तक सेब या अन्य फल सरकार को दिए थे. इसके बाद 100 बैग तक उपज देने वाले किसानों का भुगतान किया जाना था. हालांकि, एसोसिएशन का आरोप है कि कई किसान जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. संजय चौहान के मुताबिक, कुछ किसानों ने एक महीने से भी पहले अपनी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली थी, लेकिन अभी तक उनके बैंक खातों में पैसा नहीं पहुंचेगा.
एसोसिएशन के अनुसार, अधिकारियों की ओर से भुगतान में देरी की वजह पिछले साल MIS के तहत कुछ जगहों पर खरीदे गए सेब के बैगों की संख्या में कथित गड़बड़ियों की जांच को बताया जा रहा है. एसोसिएशन का कहना है कि जिन किसानों का इन कथित गड़बड़ियों से कोई संबंध नहीं है, उनका भुगतान रोकना सही नहीं है. ऐसे किसानों को अपने पैसे के लिए इंतजार करना पड़ रहा है और इससे उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ रही है. संजय चौहान ने कहा कि एसोसिएशन MIS के तहत सेब खरीद में हुई कथित गड़बड़ियों को गंभीर मामला मानती है. उनका कहना है कि इस मुद्दे की पुष्टि राज्य के बागवानी मंत्री ने भी विधानसभा में एक विधायक के सवाल के जवाब में की थी.
एसोसिएशन ने MIS के तहत सेब खरीद का काम करने वाली सरकारी एजेंसियों हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन और प्रसंस्करण निगम (HPMC) और हिमफेड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी गड़बड़ी अधिकारियों और कलेक्शन सेंटरों पर तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है. हालांकि, ये आरोप एसोसिएशन की ओर से लगाए गए हैं. एसोसिएशन ने पिछले साल कलेक्शन सेंटरों से MIS के तहत खरीदे गए सेब समय पर नहीं उठाए जाने का भी आरोप लगाया. संगठन के मुताबिक, बाद में सड़क जाम का हवाला देकर कुछ जगहों पर उपज को वहीं नष्ट कर दिया गया.
एसोसिएशन ने कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही, अगर सरकारी खरीद में किसी तरह का नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई दोषियों से कराने की भी मांग की गई है. संगठन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए MIS की खरीद व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की मांग की है. कलेक्शन सेंटरों पर कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट नियम बनाने और उनके काम में राजनीतिक या किसी अन्य तरह के हस्तक्षेप को रोकने की भी मांग की गई है.
एप्पल ग्रोअर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मार्केट इंटरवेंशन स्कीम को जारी रखने की अपील की है. संगठन के मुताबिक, यह योजना किसानों को तब राहत देती है जब बाजार में फलों और दूसरी कृषि उपज के दाम बहुत गिर जाते हैं. इस योजना के तहत सरकारी एजेंसियां किसानों से उनकी उपज खरीदती हैं, ताकि बाजार में कम कीमत मिलने की स्थिति में किसानों को कुछ सहारा मिल सके. हिमाचल प्रदेश में यह योजना सेब और खट्टे फलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. संगठन ने कहा है कि अगर केंद्र या राज्य सरकार MIS को बंद करने का फैसला करती है, तो वह इसका विरोध करेगा. एसोसिएशन का कहना है कि सेब किसान पहले से ही कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं और MIS बंद होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. (ANI)