प्याज की बढ़ती कीमतों पर कृषि मंत्री सख्त, बोले- किसानों को कम और बिचौलियों को ज्यादा फायदा क्यों?

प्याज की बढ़ती कीमतों पर कृषि मंत्री सख्त, बोले- किसानों को कम और बिचौलियों को ज्यादा फायदा क्यों?

दिल्ली में प्याज की कीमत करीब 60 रुपये किलो पहुंचने के बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है. उन्होंने बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम और उपभोक्ताओं को उचित कीमत मिलनी चाहिए.

शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 28, 2026,
  • Updated Aug 28, 2026, 9:07 AM IST

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले और दूसरी ओर ग्राहकों पर महंगी प्याज का बोझ भी न पड़े. राजधानी दिल्ली में इन दिनों प्याज की खुदरा कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. ऐसे में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारना शुरू कर दिया है.

बिचौलियों को ज्यादा फायदा क्यों?

कृषि मंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई थी. महाराष्ट्र में किसानों को प्याज के लिए सिर्फ 7 से 8 रुपये प्रति किलो तक मिल रहे थे. यह कीमत किसानों की उत्पादन लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं थी. ऐसे समय में केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और किसानों से प्याज की खरीद करनी पड़ी. अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है.  किसानों के पास प्याज का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, क्योंकि वे अपनी उपज पहले ही बेच चुके हैं. दूसरी तरफ बाजार में प्याज की कीमत बढ़कर करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किसान को कम कीमत मिलने और उपभोक्ता के ज्यादा कीमत चुकाने के बीच का फायदा आखिर किसे मिल रहा है.

दाम कम करने के लिए बनाई गई टीम

शिवराज सिंह चौहान ने एक कार्यक्रम में बिचौलियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या किसानों को उनकी मेहनत और पसीने की पूरी कीमत मिलती है? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि बाजार की व्यवस्था में ऐसा बदलाव होना चाहिए, जिससे किसान और उपभोक्ता दोनों के हित सुरक्षित रह सकें. उन्होंने बताया कि सरकार ने इस दिशा में काम करने के लिए एक टीम भी बनाई है. कृषि मंत्री ने कृषि की पूरी वैल्यू चेन में किसानों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई. उनका कहना है कि किसान सिर्फ फसल पैदा करने तक सीमित न रहें, बल्कि भंडारण, प्रोसेसिंग और बाजार से जुड़ी व्यवस्था में भी उनकी भागीदारी बढ़नी चाहिए. इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी कम किया जा सकता है.

खाद्य सुरक्षा को लेकर भी चिंता

कृषि मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत किसी दूसरे देश पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रह सकता. पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए देश के लिए अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने में आत्मनिर्भर रहना जरूरी है. उन्होंने टिकाऊ खेती पर भी जोर दिया. कृषि मंत्री ने कहा कि मिट्टी की सेहत बचाने के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल में संतुलन जरूरी है. इसके साथ ही पानी का सही इस्तेमाल, एकीकृत खेती, प्राकृतिक खेती और जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना होगा.

खेत तक पहुंचे तकनीक और रिसर्च

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए सीधे खेतों में जाना चाहिए. पहले खेत में समस्या को समझा जाए और उसके बाद उसी के आधार पर रिसर्च और तकनीक विकसित की जाए. इससे वैज्ञानिक शोध का सीधा लाभ किसानों तक पहुंच सकेगा. उन्होंने उद्योग जगत से भी कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की अपील की. खासतौर पर भंडारण, प्रोसेसिंग और दूसरी कृषि सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कंपनियां अपने CSR फंड का इस्तेमाल किसानों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें बेहतर तकनीक उपलब्ध कराने के लिए कर सकती हैं.

कृषि मंत्र ने पर्यावरण संरक्षण को भी कृषि और विकास से जोड़ते हुए कहा कि विकास की दौड़ में इंसान ने प्रकृति के साथ काफी छेड़छाड़ की है. इसका परिणाम लगातार सामने आ रहे संकटों के रूप में दिखाई दे रहा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि धरती सिर्फ वर्तमान पीढ़ी की नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भी इस पर अधिकार है, इसलिए विकास के साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी जरूरी है. 

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