Sugar Price: चीनी के दाम घटाने की तैयारी, महाराष्ट्र में 15 दिन पहले शुरू हो सकती है गन्ने की पेराई

Sugar Price: चीनी के दाम घटाने की तैयारी, महाराष्ट्र में 15 दिन पहले शुरू हो सकती है गन्ने की पेराई

चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए महाराष्ट्र सरकार गन्ने की पेराई 15 दिन पहले शुरू करने पर विचार कर रही है। इससे बाजार में नई चीनी की सप्लाई बढ़ेगी और त्योहारी सीजन में ग्राहकों को राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन और रिकवरी रेट पर बारिश की कमी का असर पड़ सकता है।

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 31, 2026,
  • Updated Aug 31, 2026, 2:29 PM IST

चीनी की बढ़ती कीमतों को थामने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक बड़ा कदम कदम उठा सकती है. राज्य सरकार प्रदेश में गन्ने की पेराई को सामान्य तारीख से 15 दिन पहले शुरू कर सकती है. महाराष्ट्र में अमूमन 1 नवंबर से गन्ने की पेराई शुरू होती है. लेकिन महाराष्ट्र सरकार गन्ना मिलों को इस तारीख को 15 दिन पहले यानी 15 अक्टूबर को शुरू करने का निर्देश दे सकती है. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने एक रिपोर्ट में जानकारी दी है.

महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला इसलिए आ सकता है क्योंकि केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद बाजार में चीनी के खुदरा दाम कम नहीं हो रहे हैं. हालांकि गिरावट जरूर है, मगर बहुत नहीं जिससे कि ग्राहकों को कुछ फायदा मिल सके. अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र में अगर 15 दिन पहले गन्ने की पेराई शुरू होती है, तो बाजार में चीनी की नई खेप उतरेगी जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी. इससे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को सस्ती चीनी मिल सकती है.

महाराष्ट्र में 15.4 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती

शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि महाराष्ट्र में 15.4 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई है जिसे मिलों में पेराई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के शुगर कमिश्नरेट ने मिलों से पेराई लाइसेंस का आवेदन मांगा है और कहा है कि मिल मालिक सितंबर अंत तक लाइसेंस लेने का काम निपटा लें. मिलों को यह भी कहा गया है कि नया लाइसेंस लेने से पहले किसानों को उनके गन्ने का पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाए.

एक अधिकारी ने बताया कि इस बार चीनी का ओपनिंग स्टॉक कम रह सकता है. ऐसी सूरत में गन्ने की पेराई समय से पहले शुरू होने से चीनी की सप्लाई में अच्छी मदद मिल सकती है. इससे चीनी के दाम घटाने में भी मदद मिलेगी.

अभी चीनी की खुदरा कीमतें लगभग 55 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं, जो इस महीने की शुरुआत में कीमतों में उछाल से पहले के स्तर से लगभग 10 रुपये ज्यादा हैं. सरकार ने चीनी की सप्लाई बेहतर करने के लिए पहले ही 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दे दी है.

चीनी कीमतों में तुरंत गिरावट नहीं

इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का कहना है कि सप्लाई अभी भी कम है और कीमतों में तुरंत बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. देश में अभी लगभग 35 लाख टन चीनी का स्टॉक है, लेकिन त्योहारों के दौरान खपत में काफी बढ़ोतरी की उम्मीद है. गणेशोत्सव आने वाला है. इसके बाद, 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि के दौरान पूर्वी राज्यों से चीनी की मांग बढ़ती है. फिर दशहरा और दिवाली भी हैं.

जानकारों का कहना है कि चीनी की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए क्रशिंग सीजन को जल्दी शुरू करने का फैसला लिया जा सकता है.
पिछले सीज़न में सप्लाई की चुनौती सामने आई थी. हालांकि लगभग 16.4 लाख हेक्टेयर में गन्ना उपलब्ध था, लेकिन क्रशिंग सिर्फ 104 दिन चली. इस सीजन में लगभग 99 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ.

बारिश की कमी से चीनी रिकवरी कम

चीनी मामलों के जानकार विजय औटाडे ने चेतावनी दी कि सिर्फ खेती के रकबे से चीनी के उत्पादन का पता नहीं चलता. उन्होंने 'टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा, "असल बात यह है कि आखिर कितनी गन्ना मिलों तक पहुंचती है, प्रति हेक्टेयर पैदावार कितनी है और गन्ने से कितनी चीनी निकलती है."

औटाडे ने कहा कि सोलापुर और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में बारिश की कमी से चीनी रिकवरी रेट पर असर पड़ सकता है. इन इलाकों में महाराष्ट्र की कुल चीनी का लगभग 40% उत्पादन होता है. उन्होंने कहा, "बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई किसानों ने पिछले साल देर से गन्ने की बुवाई की थी. नवंबर तक, हो सकता है कि उनमें से कुछ फसल इतनी न पकी हो कि उससे सबसे अच्छी चीनी रिकवरी मिल सके."

उन्होंने आगे कहा कि फसल का एक हिस्सा गुड़ बनाने और नई बुवाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे क्रशिंग के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा कम हो जाएगी.

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