कम बारिश से फसलों पर संकट, आंध्र सरकार ने अधिकारियों को दिए तुरंत सिंचाई के निर्देश

कम बारिश से फसलों पर संकट, आंध्र सरकार ने अधिकारियों को दिए तुरंत सिंचाई के निर्देश

आंध्र प्रदेश में कम बारिश से खरीफ फसलों पर संकट बढ़ गया है. कई इलाकों में खेतों की नमी कम होने से फसलें मुरझाने लगी हैं. इसे देखते हुए कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू ने अधिकारियों को फसलों को बचाने के लिए सिंचाई के हर संभव स्रोत का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं.

कम बारिश से फसलों पर संकटकम बारिश से फसलों पर संकट
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 14, 2026,
  • Updated Sep 14, 2026, 10:50 AM IST

आंध्र प्रदेश में कम बारिश ने खरीफ फसलों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य के कई इलाकों में बारिश पर्याप्त नहीं होने से खेतों में मिट्टी की नमी तेजी से कम हो रही है. कई जगह फसलें नमी की कमी के कारण मुरझाने लगी हैं, जिससे किसानों को उत्पादन प्रभावित होने का डर सता रहा है. मौसम की इस स्थिति और संभावित अल नीनो के असर को देखते हुए राज्य सरकार ने फसलों को बचाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. राज्य के कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसानों को राहत देने और फसलों में नमी बनाए रखने के लिए तुरंत जरूरी इंतजाम किए जाएं. उन्होंने कहा कि सुरक्षात्मक सिंचाई के लिए पानी के हर उपलब्ध स्रोत का इस्तेमाल किया जाए, ताकि कम बारिश के बीच फसलों को सूखने से बचाया जा सके.

54 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी

कृषि मंत्री ने बारिश, खरीफ फसल की बुवाई और खेतों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की. अधिकारियों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में 1 जून से 12 सितंबर के बीच सामान्य तौर पर 476.1 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस दौरान सिर्फ 218.2 मिमी बारिश हुई.  यानी राज्य में सामान्य से 54.2 फीसदी कम बारिश हुई है. कम बारिश के साथ अल नीनो की स्थिति का असर भी फसलों पर पड़ रहा है. इससे खेतों में नमी की कमी यानी मॉइस्चर स्ट्रेस बढ़ गया है.

2.4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसल प्रभावित

12 सितंबर तक राज्य में करीब 26.50 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की खेती की गई है. इसमें करीब 12.01 लाख हेक्टेयर में धान और 4.11 लाख हेक्टेयर में कपास शामिल है. कम बारिश का असर राज्य के 284 मंडलों और 1,792 रायतू सेवा केंद्रों (RSK)/गांवों में देखने को मिला है. कुल मिलाकर 2.4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है. इनमें करीब 1.9 लाख हेक्टेयर में खेतों में नमी की कमी पाई गई है. वहीं, 41,474 हेक्टेयर में फसलें मुरझा गई हैं, जबकि 10,582 हेक्टेयर में फसलें सूख गई हैं.

कुरनूल में सबसे ज्यादा असर

कम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका कुरनूल में सामने आया है. यहां एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है. इसके बाद नंड्याल में 80,751 हेक्टेयर और अनंतपुर में 32,456 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है. फसलों की बात करें तो अरहर  और कपास पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. अरहर की करीब 74,301 हेक्टेयर और कपास की 73,733 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है.

खेतों का निरीक्षण कर तुरंत कार्रवाई के निर्देश

कृषि मंत्री अच्चन्नायडू ने कृषि और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को मिलकर काम करने को कहा है. उन्होंने अधिकारियों को खेतों का लगातार निरीक्षण करने और जहां जरूरत हो, वहां तुरंत सिंचाई की व्यवस्था करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि फसलों को बचाने के लिए उपलब्ध पानी के हर स्रोत का इस्तेमाल किया जाए, ताकि किसानों को ज्यादा नुकसान न उठाना पड़े.

वैकल्पिक फसलों पर भी जोर

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को फसल से जुड़ा बाकी सर्वे और डेटा अपडेट करने का काम जल्द पूरा करने को कहा है. साथ ही, ऐसे इलाकों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं जहां कम पानी में पैदा होने वाली वैकल्पिक फसलों की खेती की जा सकती है. अभी तक करीब 34,567 हेक्टेयर में वैकल्पिक फसलें लगाई जा चुकी हैं, जबकि 95,112 हेक्टेयर क्षेत्र में यह काम बाकी है. सरकार का कहना है कि कम बारिश की स्थिति में किसानों की फसल बचाने के लिए सिंचाई और वैकल्पिक फसल जैसे उपायों पर तेजी से काम किया जाएगा. (PTI)

MORE NEWS

Read more!