
आंध्र प्रदेश में संभावित अल नीनो प्रभाव और बारिश की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार सतर्क हो गई है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों और जिला कलेक्टरों के साथ समीक्षा बैठक कर किसानों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए तेजी में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. अमरावती स्थित रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) सेंटर में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अल नीनो के प्रभाव से जूझ रहे किसानों का बोझ कम करने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाएगी. इसके तहत किसानों को उनके क्षेत्र और उपलब्ध जल संसाधनों के अनुसार वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा.
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के बीच जागरुकता अभियान तेज किया जाए और उन्हें अल नीनो के संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी दी जाए. उन्होंने कहा कि जहां पानी की कमी की आशंका है, वहां किसानों को कम पानी वाली और स्थानीय मौसम और जलवायु के अनुकूल फसलों की खेती के लिए तैयार किया जाना चाहिए.
नायडू ने यह भी कहा कि पहले से लागू राहत उपायों को और मजबूत बनाया जाए ताकि मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना करने में किसानों को मदद मिल सके.
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों को फसल बीमा कार्य योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए. उनका कहना था कि मौसम संबंधी जोखिम बढ़ने की स्थिति में फसल बीमा किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा और फसल नुकसान होने पर आर्थिक राहत दिलाएगा.
इस साल आंध्र प्रदेश में सामान्य से करीब 51 प्रतिशत कम बारिश होने की संभावना है. इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है. राज्य की प्रमुख नदियों में पानी का बहाव भी सामान्य से काफी कम दर्ज किया जा रहा है. आमतौर पर इस समय पोलावरम परियोजना क्षेत्र में गोदावरी नदी से लगभग एक लाख क्यूसेक बाढ़ का पानी आता है, लेकिन इस साल कम बारिश के कारण केवल 35,000 से 38,000 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो रहा है.
पानी के बहाव में कमी का असर गोदावरी और कृष्णा नदी बेसिन दोनों पर पड़ रहा है. इससे उन किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है जो परंपरागत रूप से अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों की खेती करते हैं. अधिकारियों के अनुसार, गोदावरी और कृष्णा सिंचाई क्षेत्रों में करीब 70 प्रतिशत किसानों ने बुवाई पूरी कर ली है, लेकिन जो किसान अभी खेती शुरू करने वाले हैं, उन्हें पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर फसल को अपनाने की सलाह दी गई है.
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान सरकारी सेवाओं की पहुंच को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने हाल ही में अलूर विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान लोगों से मिले फीडबैक का जिक्र करते हुए कहा कि दूरदराज के इलाकों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकारी कर्मचारियों का व्यवहार और सेवा देने का तरीका लोगों की अपेक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए.
राज्य सरकार की रणनीति का मुख्य उद्देश्य किसानों को मौसम जनित जोखिमों से बचाना है. इसके लिए फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, जागरुकता अभियान और फसल बीमा जैसी योजनाओं को एक साथ लागू किया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इन उपायों से अल नीनो और संभावित सूखे की स्थिति में किसानों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.(अपूर्वा का इनपुट)