
बुंदेलखंड में खेती को अक्सर मौसम की चुनौती और पानी की कमी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सागर जिले के खुरई तहसील के खिमलासा गांव के किसान अमित जैन ने आधुनिक तकनीक और नई सोच के जरिए खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने की मिसाल पेश की है.सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत ‘सेवा की कहानी’ श्रृंखला में आज कहानी ऐसे ही प्रगतिशील किसान की है, जिन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर विदेशी और उन्नत किस्म की सब्जियों की खेती शुरू की.
43 वर्षीय अमित जैन बी.कॉम. तक शिक्षित हैं.खेती में आने से पहले वह मेडिकल शॉप का संचालन करते थे. वर्ष 2012 में पिता के निधन के बाद परिवार की खेती की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा खेती में कुछ अलग और नया करे.इसी सोच के साथ अमित जैन ने आधुनिक कृषि की संभावनाओं को समझने की कोशिश शुरू की.
उन्होंने शासन की कृषि योजनाओं की जानकारी ली और उद्यानिकी विभाग, सागर से आधुनिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण के बाद उन्होंने करीब 7 एकड़ में आधुनिक सब्जी उत्पादन शुरू किया.यहां ब्रोकली, रेड कैबेज, चाइना कैबेज, लेट्यूस सहित कई उन्नत और विदेशी किस्मों की सब्जियां उगाई जा रही हैं.
अमित जैन की उपज की मांग अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है.उनकी सब्जियां सागर के अलावा भोपाल, इंदौर और दिल्ली तक सप्लाई की जाती हैं. खास तौर पर दिल्ली की मंडियों और फाइव स्टार होटलों में विदेशी सब्जियों की मांग रहती है. किसान के मुताबिक कई मौकों पर इन सब्जियों के दाम 50 रुपये प्रति किलो से अधिक तक मिल जाते हैं.मांग बढ़ने के कारण कई बार उनके पास इतने ऑर्डर आ जाते हैं कि वह पूरी मांग को पूरा नहीं कर पाते.इस खेती से अमित जैन सालाना लाखों रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं.
अमित जैन के मुताबिक आधुनिक तरीके से की जा रही सब्जी खेती में कम पानी का इस्तेमाल होता है और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर भी अपेक्षाकृत कम किया जा सकता है. बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में जहां पानी और मौसम दोनों खेती के लिए चुनौती बनते हैं, वहां इस तरह की तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में उद्यानिकी विभाग की योजनाओं ने भी अमित जैन की मदद की. उन्हें इरिगेशन सिस्टम, पैक हाउस निर्माण और वर्मी कम्पोस्ट के लिए सब्सिडी का लाभ मिला. इससे आधुनिक खेती के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने में मदद मिली और उत्पादन के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता एवं बाजार तक पहुंच बेहतर हुई.
अमित जैन की कहानी बताती है कि खेती में नई तकनीक, बाजार की मांग और सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल किया जाए तो पारंपरिक फसलों से अलग हटकर भी बेहतर बाजार वाली फसलों का उत्पादन किया जा सकता है. खिमलासा गांव का यह किसान आज बुंदेलखंड में आधुनिक और उन्नत सब्जी खेती की एक अलग पहचान बना रहा है.