बालाघाट में धान की फसल को कीट-व्याधियों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने खेतों का निरीक्षण तेज कर दिया है.ओरम्हा में रात्रिकालीन किसान संगोष्ठी आयोजित कर किसानों को कीट-रोग की पहचान और नियंत्रण के उपाय बताए गए। मोहगांव खुर्द, खारा, सिवनीकला और सारद में खेतों के निरीक्षण के दौरान माहू और लीफ ब्लाइट का प्रकोप पाया गया.
मध्य प्रदेश में मूंग और उड़द की फसल को जल्दी सुखाने के लिए पैराक्वाट के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके अवशेष मिट्टी और पानी तक पहुंच सकते हैं.
सागर के खिमलासा गांव के किसान अमित जैन ने 7 एकड़ में ब्रोकली, रेड कैबेज, चाइना कैबेज और लेट्यूस जैसी विदेशी सब्जियों की खेती शुरू की.उनकी उपज सागर से लेकर भोपाल, इंदौर और दिल्ली तक सप्लाई होती है.आधुनिक तकनीक और सरकारी सब्सिडी की मदद से वह सालाना लाखों रुपये की आमदनी कमा रहे हैं.
सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र में आंधी-तूफान और बारिश से मक्का व उड़द की फसलों को नुकसान हुआ है. किसानों ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को ज्ञापन देकर मुआवजे की मांग की. मंत्री ने सुरखी, जैसीनगर और राहतगढ़ में जल्द फसल सर्वे कराने के निर्देश दिए.
Paddy Procurement: मध्य प्रदेश में खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा बेचने के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन 15 सितंबर से शुरू हो गया है. राज्य में 1100 से अधिक रजिस्ट्रेशन सेंटर बनाए गए हैं.
सीहोर के भाऊखेड़ी में सोयाबीन दिवस एवं कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ. 148 किसानों ने हिस्सा लिया.यहां जल्द नया कृषि विज्ञान केंद्र शुरू होगा, जिससे किसानों को उन्नत किस्मों, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह मिलेगी.
सोयाबीन की फलन और पॉड निर्माण अवस्था में चारकोल रॉट, गर्दन सड़न, पॉड ब्लाइट और राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट का खतरा बढ़ सकता है. कृषि वैज्ञानिकों ने रोगों की पहचान और फफूंदनाशक के उपयोग की अनुशंसा बताई है.
मूंग-उड़द की फसल में पीतशिरा रोग और फली छेदक कीट के प्रकोप से किसान परेशान हैं.पाटन के रोंझा गांव में कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने मौके पर पहुंचकर बीमारी की पहचान और फसल बचाने के उपाय बताए.धान और मक्का में कीट नियंत्रण की सलाह भी दी गई.
शाजापुर में सोयाबीन की फसल पर पीला मोजेक और कीट व्याधि को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने कई गांवों का दौरा किया. खेतों का निरीक्षण कर किसानों को रोगग्रस्त पौधों को हटाने, सफेद मक्खी-एफिड की रोकथाम और कीट नियंत्रण के लिए जरूरी सलाह दी गई.
मध्य प्रदेश के खरगोन में हरी मिर्च की कीमतों में गिरावट से किसान परेशान हैं. टांडा बरुड़ के किसान ने लागत नहीं निकलने पर दो एकड़ की खड़ी फसल नष्ट कर दी. किसान ने फसल में वायरस लगने की समस्या भी बताई है.
मध्य प्रदेश में मूंग की फसल को जल्द सुखाकर मंडी पहुंचाने के लिए कुछ किसानों द्वारा पेस्टिसाइड के इस्तेमाल का मामला चिंता बढ़ा रहा है.पैराक्वाट डाइक्लोराइड जैसे रसायनों के बढ़ते इस्तेमाल से फसल, मिट्टी और खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
मध्यप्रदेश में बारिश, सूखा, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का जोखिम बढ़ रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का अहम सहारा है.लेकिन सरकारी आंकड़े और किसानों की शिकायतें नुकसान के आकलन, क्लेम प्रक्रिया और भुगतान में देरी को लेकर कई सवाल खड़े करती हैं.
सिहोरा में किसानों ने फसल विविधीकरण अभियान के तहत तिल की खेती को अपनाकर नई उम्मीद जगाई है.कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों का अवलोकन कर किसानों को तिल की खेती के फायदे और संभावनाओं की जानकारी दी.
सागर जिले के बीना के ग्राम मंडी बमोरा के किसान वीरेंद्र रघुवंशी ने करीब डेढ़ एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है. कृषि विभाग के मार्गदर्शन में ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक तकनीकों से खेती की जा रही है.हाई-वैल्यू फसल से किसान को बेहतर और दीर्घकालीन आय की उम्मीद है.
पाटन के ग्राम केमोरी में कृषि अधिकारियों ने उड़द की नई किस्म IPU-13-01 का खेत निरीक्षण किया. इस दौरान किसानों को किस्म की विशेषताओं के साथ फसल प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण और बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई.
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है. सरकार और किसानों के बीच 60% कोटा यानी प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग खरीदी पर सहमति बनी थी, लेकिन किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर 3 क्विंटल की जगह सिर्फ 2.88 क्विंटल की तुलाई हो रही है.
मध्यप्रदेश सरकार ने किसान वर्ष में सोयाबीन किसानों को बड़ी सौगात दी है. सीहोर जिले की इछावर तहसील के ग्राम भाऊखेड़ी में नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने को मंजूरी दी गई है. वहीं, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के संचालन के लिए 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए 795.59 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है.
सागर में आलू, प्याज और लहसुन की खेती के लिए आधुनिक प्लांटर-डिगर मशीन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.यह मशीन बुवाई से लेकर खुदाई तक का काम कर 40 से 60% तक श्रम बचाती है, लागत घटाती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है.
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