सूखा घोषित करो... लातूर में किसानों का अनोखा विरोध प्रदर्शन, तहसीलदार की टेबल पर रखी सूखी सोयाबीन

सूखा घोषित करो... लातूर में किसानों का अनोखा विरोध प्रदर्शन, तहसीलदार की टेबल पर रखी सूखी सोयाबीन

महाराष्ट्र के लातूर में कम बारिश से परेशान किसानों ने सूखा घोषित करने की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया. किसान खेत से सूखी सोयाबीन की फसल लेकर तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार की टेबल पर फसल रखकर अपना दर्द दिखाया.

Advertisement
सूखा घोषित करो... लातूर में किसानों का अनोखा विरोध प्रदर्शन, तहसीलदार की टेबल पर रखी सूखी सोयाबीनकिसानों का अनोखा विरोध प्रदर्शन

महाराष्ट्र के लातूर जिले में कम बारिश और फसल सूखने से परेशान किसानों ने सूखा घोषित करने की मांग को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. किसानों ने शिरूर अनंतपाल शहर में सरकार और प्रशासन के खिलाफ रैली निकाली. इसके बाद बड़ी संख्या में किसान तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार के सामने अपनी समस्या रखी. किसानों ने प्रशासन को अपनी परेशानी दिखाने के लिए अपने खेतों से सूख चुकी सोयाबीन की फसल काटकर तहसील कार्यालय पहुंचाई. किसानों ने सूखी फसल को तहसीलदार की टेबल पर रखते हुए लातूर जिले को जल्द से जल्द सूखा घोषित करने की मांग की. किसानों ने इस दौरान अपनी मांगों को लेकर तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा.

किसानों ने जताई नाराजगी

आंदोलन में शामिल किसान शिवाजी पेटे ने कहा कि लातूर जिले में सूखे जैसे गंभीर हालात हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से किसानों के खेतों में फसल नुकसान का पंचनामा करने के लिए अधिकारी नहीं पहुंचे हैं. उनका कहना है कि किसानों ने इस समस्या को लेकर तहसील कार्यालय में कई बार निवेदन दिया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में बदलाव नहीं हुआ. शिवाजी पेटे ने कहा कि अधिकारी अगर किसानों के खेतों में आकर सूखी फसल नहीं देख रहे हैं, तो किसान खुद ही अपने खेत की स्थिति उनके सामने लेकर आए हैं. इसी वजह से किसान सूखी सोयाबीन की फसल काटकर तहसील कार्यालय पहुंचे और उसे अधिकारियों के सामने रखा.

40 फीसदी से ज्यादा सूखे सोयाबीन

किसानों का कहना है कि इस साल भी लातूर जिले में बारिश कम होने के कारण सोयाबीन की फसल को काफी नुकसान हुआ है. किसानों के अनुसार, जिले के कई इलाकों में 40 फीसदी से ज्यादा सोयाबीन की फसल सूख चुकी है. बारिश की कमी के कारण कई जगहों पर किसानों को दोबारा बुवाई तक करनी पड़ी है. दोबारा बुवाई में किसानों का खर्च बढ़ गया है. वहीं, पहले से बोई गई फसल खराब होने के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है. किसानों का कहना है कि अगर समय पर सरकारी मदद नहीं मिली तो उनकी परेशानी और बढ़ सकती है.

जल्द पंचनामा और मुआवजे की मांग

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द फसल नुकसान का पंचनामा कराया जाए. इसके बाद नुकसान के आधार पर किसानों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए. किसानों का कहना है कि सूखे की स्थिति को देखते हुए सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए, ताकि नुकसान झेल रहे किसानों को राहत मिल सके. किसानों ने साफ कहा कि उनका प्रदर्शन प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने और खेतों में हुए नुकसान को सामने लाने के लिए किया गया है. अब उनकी नजर सरकार और प्रशासन की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई पर है.

5 अक्तूबर से होगा फसल नुकसान का सर्वे

बता दें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य में फसल नुकसान का सर्वे 5 अक्टूबर के बाद कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसानों को नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड NDRF से मदद मिलने में समय लग सकता है, इसलिए राज्य सरकार उससे पहले अपने संसाधनों से किसानों को आर्थिक सहायता देगी. (अनिकेत अंकुश जाधव की रिपोर्ट)

POST A COMMENT