
छत्तीसगढ़ में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को अरहर की उन्नत खेती की तकनीक से जोड़ने के लिए आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत सरगुजा जिले में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है.कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा की पहल पर चयनित पांच गांवों में किसानों के खेतों पर 55 हेक्टेयर रकबे में छत्तीसगढ़ अरहर-1 और छत्तीसगढ़ अरहर-2 किस्मों का प्रदर्शन किया गया है.
वर्तमान में प्रदर्शन वाली अरहर की फसल अच्छी बढ़वार, हरित वृद्धि और शाखाओं के विकास के साथ पूर्व-फूलावस्था से फूल आने की शुरुआती अवस्था में पहुंच गई है. इस चरण में वैज्ञानिक किसानों को फसल प्रबंधन, पोषण, खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दे रहे हैं.
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार डॉ. एस.एस. टुटेजा के निर्देशानुसार तथा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में यह समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन संचालित किया जा रहा है.
इसके अंतर्गत अंबिकापुर विकासखंड के सोहगा, बरकेला, खजुरी और नानदमाली तथा उदयपुर विकासखंड के कुमडेवा गांव में किसानों के खेतों पर अरहर की उन्नत उत्पादन तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसानों को केवल नई किस्मों से परिचित कराना नहीं, बल्कि पूरी उत्पादन तकनीक को खेत पर प्रदर्शित करना है.
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदर्शन वाले खेतों में अरहर के पौधों में अच्छी हरित वृद्धि और शाखाओं का विकास देखने को मिल रहा है.फसल अब उस महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच रही है, जहां फूल आने के बाद फलियों का निर्माण होगा. ऐसे में इस समय फसल की नियमित निगरानी और समय पर प्रबंधन उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में खरपतवार, नमी की स्थिति, पोषक तत्वों की उपलब्धता और कीट-रोगों की नियमित निगरानी करें. विशेष रूप से फूल एवं फली बनने की अवस्था में फली छेदक जैसे कीटों पर नजर रखने की सलाह दी गई है.आवश्यकता होने पर कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार ही कीटनाशी का उपयोग करने को कहा गया है.
इस प्रदर्शन की एक महत्वपूर्ण कड़ी किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन से जोड़ना भी है. कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों का सीड हब के अंतर्गत बीज पंजीयन कराया गया है. इससे किसानों को उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन की तकनीक समझने और भविष्य में गुणवत्तापूर्ण दलहन बीज उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
इस पहल से किसानों के लिए अरहर की खेती केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और अतिरिक्त आय के अवसर से भी जुड़ सकती है.
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक लगातार प्रदर्शन वाले खेतों का निरीक्षण कर किसानों को आवश्यक तकनीकी सलाह दे रहे हैं. डॉ. पी.आर. पैकरा, डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार सांडिल्य एवं डॉ. लीलाधर साहू किसानों को उन्नत अरहर उत्पादन तकनीक, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और समन्वित कीट प्रबंधन की जानकारी दे रहे हैं.
वैज्ञानिकों के अनुसार फूल आने से पहले और फूल आने के शुरुआती चरण में फसल की उचित देखभाल आगे बनने वाले फूलों और फलियों की संख्या तथा संभावित उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण होती है. इसलिए किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और आवश्यक कृषि कार्य समय पर पूरा करने की सलाह दी गई है.
55 हेक्टेयर में किए जा रहे इस समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन से किसानों को खेत पर ही उन्नत किस्मों और उत्पादन तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव मिल रहा है. प्रदर्शन क्षेत्रों में फसल की अच्छी स्थिति से किसानों में अरहर की उन्नत खेती और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है.आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत इस तरह के प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर उन्नत तकनीक को अपनाने और दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.