छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत 55 हेक्टेयर में छत्तीसगढ़ अरहर-1 और अरहर-2 किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है. फसल फूल आने की अवस्था में पहुंच गई है. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को फसल प्रबंधन, पोषण, कीट नियंत्रण और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की तकनीकी जानकारी दे रहे हैं.
महासमुन्द के गुलझर गांव के किसान गौरव कुठारे ने धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर आमदनी बढ़ाई.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिले 30 हजार रुपये के अनुदान और ड्रिप-मल्चिंग तकनीक की मदद से एक एकड़ में करीब 23 टन बैंगन का उत्पादन कर लगभग 2.65 लाख रुपये की सकल आमदनी हासिल की.
छत्तीसगढ़ में हल्दी की खेती को बढ़ावा देने के लिए 1300 हेक्टेयर क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है. मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के तहत 6.20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है.अब तक किसानों को 1.38 करोड़ रुपये का अनुदान भुगतान किया जा चुका है.
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 की बोनी लगभग पूरी हो चुकी है. अब तक 98% लक्ष्य हासिल किया जा चुका है.सरकार ने लक्ष्य से ज्यादा खाद का भंडारण किया है और किसानों को अब तक 12.71 लाख मीट्रिक टन खाद बांटी जा चुकी है.जानें पूरी रिपोर्ट में बोनी, खाद-बीज वितरण, बारिश और कृषि ऋण से जुड़ी पूरी जानकारी.
छत्तीसगढ़ के IGKV रायपुर में 3000 से ज्यादा दुर्लभ धान किस्मों का अनमोल संग्रह संरक्षित है. 14 MM लंबे डोकरा डोकरी से लेकर 3.4 MM के केराडोम तक, जानिए धान म्यूजियम की अनोखी किस्मों और इनके संरक्षण की कहानी.
महासमुंद के किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने धान के साथ करेले की खेती शुरू कर अपनी आमदनी बढ़ाई.राष्ट्रीय बागवानी मिशन की मदद और ड्रिप-मल्चिंग जैसी तकनीकों से उन्हें एक एकड़ में करीब 12 टन करेला मिला और खर्च निकालकर ₹1.07 लाख का शुद्ध लाभ हुआ.
धान की फसल में कीटों के संभावित प्रकोप को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. पी. के. राय ने नियमित निगरानी, प्रभावित पौधों को हटाने, कीटों के संरक्षण और जरूरत पड़ने पर ही अनुशंसित मात्रा में कीटनाशी इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
छत्तीसगढ़ में सतावर की खेती किसानों के लिए कम लागत में अतिरिक्त आमदनी का नया जरिया बन रही है. धमतरी, कांकेर और कोंडागांव के 65 किसान करीब 140 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं.
बलरामपुर में Digital Crop Survey के जरिए खेत-खेत पहुंचकर बोई गई फसल की वास्तविक जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जा रही है. इससे फसलवार सटीक डेटा तैयार होगा और आगामी धान खरीदी को आसान, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी.
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 की बुवाई का लक्ष्य लगभग पूरा हो गया है. राज्य में 48.69 लाख हेक्टेयर में बोनी के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 47.40 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 97 प्रतिशत है.
छत्तीसगढ़ के खेतों में सिर्फ चावल नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर धान की अनोखी विरासत भी मौजूद है. लाइचा, महाराजी, गठुवन और चपटी गुरुमटिया जैसी पारंपरिक किस्मों पर शोध जारी है.अब इन खास किस्मों के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने और फार्मा सेक्टर के लिए कच्चा माल तैयार करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.
जीपीएम जिले के ग्राम मडना में राष्ट्रीय मिशन-ऑयल पाम के तहत 8 हेक्टेयर भूमि में 1,144 ऑयल पाम पौधों का रोपण शुरू किया गया.किसानों को शासकीय अनुदान के साथ तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे फसल विविधीकरण और दीर्घकालीन आय के नए अवसर बढ़ेंगे.
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