छत्तीसगढ़ के खेतों में सिर्फ चावल नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर धान की अनोखी विरासत भी मौजूद है. लाइचा, महाराजी, गठुवन और चपटी गुरुमटिया जैसी पारंपरिक किस्मों पर शोध जारी है.अब इन खास किस्मों के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने और फार्मा सेक्टर के लिए कच्चा माल तैयार करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.
जीपीएम जिले के ग्राम मडना में राष्ट्रीय मिशन-ऑयल पाम के तहत 8 हेक्टेयर भूमि में 1,144 ऑयल पाम पौधों का रोपण शुरू किया गया.किसानों को शासकीय अनुदान के साथ तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे फसल विविधीकरण और दीर्घकालीन आय के नए अवसर बढ़ेंगे.
महासमुंद की महिला किसान कुमारी चंद्राकर ने पारंपरिक धान की खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाई. राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 0.64 हेक्टेयर में गेंदे की खेती के लिए उन्हें ₹12,800 का अनुदान मिला.उन्होंने प्रति एकड़ करीब 20 क्विंटल गेंदा उत्पादन कर लगभग ₹31 प्रति किलो की दर से बिक्री की और खर्च निकालने के बाद करीब ₹2.07 लाख की शुद्ध आय हासिल की.
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की बोनी ने रफ्तार पकड़ ली है.11 अगस्त तक प्रदेश में 45.62 लाख हेक्टेयर में बोनी पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 94% है. किसानों को अब तक 11.23 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.55 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किया गया है. वहीं, किसानों को 7,487.46 करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण भी दिया जा चुका है.
छत्तीसगढ़ का हरेली तिहार हरियाली, खेती-किसानी, पशुधन और लोकपरंपराओं का अनूठा पर्व है.इस दिन किसान पशुओं को नहलाकर उनकी पूजा करते हैं, कृषि औजारों की साफ-सफाई कर धूप-दीप से पूजा की जाती है.
छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने के लिए पचौली की सुगंधित और औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। 8 एकड़ में शुरू हुए प्रायोगिक प्रोजेक्ट में कम लागत, साल में 2-3 कटाई और एक एकड़ से 1.5 लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफे की संभावना बताई गई है। जानिए पचौली की खेती, तेल उत्पादन और बाजार से जुड़ी पूरी जानकारी।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के किसान संतोष कुमार सिंह ने धान के साथ अदरक की खेती कर महज पौन एकड़ जमीन से करीब 4.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया.उनकी सफलता से प्रेरित होकर अब उन्होंने अदरक की खेती का रकबा बढ़ाकर एक एकड़ कर दिया है.
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्में लाईचा, गठुअन, करहनी और महाराजी अपने औषधीय गुणों के कारण चर्चा में हैं.माना जाता है कि ये चावल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ कैंसर, गठिया और श्वास संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी हो सकते हैं.
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के किसान हेमचंद साहू ने धान की पारंपरिक खेती छोड़ गेंदा फूल की खेती अपनाई.ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक की मदद से सिर्फ 0.48 हेक्टेयर में उन्होंने करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर नई मिसाल पेश की.
रायगढ़ के लैलूंगा स्थित पाकरगांव का पारंपरिक जवांफूल चावल 175–180 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है.10 एकड़ में सामूहिक खेती करने वाले किसानों का यह सुगंधित चावल रायपुर, दिल्ली और मुख्यमंत्री निवास तक पहुंच रहा है.
छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने के कारण महानदी उफान पर है. रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ के कई गांव प्रभावित हुए हैं. कई इलाकों में खेत जलमग्न हो गए हैं और सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल को भारी नुकसान की आशंका है.
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले का पारंपरिक सुगंधित विष्णुभोग चावल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है. जिले के 1,500 किसान 600 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं, जबकि महिला स्व-सहायता समूह आधुनिक ब्रांडिंग और पैकेजिंग के जरिए इसकी बिक्री कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में खरीफ 2026 की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. अब तक 33.50 लाख हेक्टेयर (69%) क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है.किसानों को 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए गए हैं.सरकार ने खाद-बीज की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं.
कम बारिश और देरी से मानसून के बीच कृषि विभाग ने किसानों को कम अवधि में पकने वाली धान की किस्में अपनाने की सलाह दी है.सीधी बुवाई से पानी, समय और लागत की बचत होगी। साथ ही फसल विविधीकरण, ड्रिप सिंचाई और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अपनाकर किसान मौसम के जोखिम को कम कर सकते हैं.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इससे रोपाई की लागत लगभग आधी हो रही है, मजदूरों पर निर्भरता कम हो रही है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने की अपील की है.
छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना के तहत किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर अदरक जैसी लाभकारी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं.सरगुजा के किसान अमित कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीक से एक एकड़ में अदरक की खेती कर करीब 5 लाख रुपये की आय अर्जित की. सरकार प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है.
बस्तर के किसान खगपति ने वर्षा आधारित पारंपरिक धान की खेती छोड़ आधुनिक कृषि तकनीक, सोलर पंप और कृषि विभाग के प्रशिक्षण की मदद से अपनी सालाना आय 80 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कर ली.जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी.
छत्तीसगढ़ सरकार ने रायगढ़ जिले के 33,017 किसानों को 113.47 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता, खाद और बीज उपलब्ध कराए हैं.समय पर मिली इस मदद से खरीफ फसलों की बुवाई तेज हुई है और किसानों में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है.
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