बालोद जिले में खरीफ 2026-27 के लिए हल्दी और अदरक की खेती को बढ़ावा देने हेतु उद्यानिकी विभाग किसानों को 49,800 रुपये तक का अनुदान देगा. योजना का लाभ ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा.
बेमेतरा जिले में ग्रीष्मकालीन उड़द-मूंग की खेती का रकबा एक साल में 285 हेक्टेयर से बढ़कर 1191 हेक्टेयर पहुंच गया है. मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेस योजना और वैज्ञानिक खेती तकनीकों के चलते किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आय मिल रही.
रायपुर में ICAR-NIBSM द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत 170 से अधिक किसानों को उन्नत धान बीज वितरित किए गए. किसानों को उच्च उत्पादन वाली धान किस्मों के साथ वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, नर्सरी एवं रोपाई तकनीकों की जानकारी भी दी गई.
महासमुंद जिले के प्रगतिशील किसान दीपक ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना और आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर करेला उत्पादन अपनाया। फसल विविधीकरण से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं।
अल-नीनो के संभावित प्रभाव और कम बारिश की आशंका के बीच धान किसानों के लिए उत्पादन बनाए रखना चुनौती बन सकता है. ऐसे में कृषि विभाग ने कतार बोनी, नमी संरक्षण और नैनो डीएपी जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है, जिससे कम वर्षा में भी धान की बेहतर पैदावार सुनिश्चित की जा सके.
खरीफ 2026 से छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती करने पर ₹15,000 प्रति एकड़ की आदान सहायता देगी.
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में फसल विविधीकरण का मॉडल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। धान की जगह पॉपकॉर्न मक्का की खेती अपनाने वाले 605 किसानों ने 1763 एकड़ में उत्पादन कर 5 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री की।
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