
मध्य प्रदेश सरकार की एमएसएमई प्रोत्साहन योजना महिलाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है. बड़वानी जिले के अंजड़ नगर की रहने वाली प्रमिला पाटीदार इसका एक उदाहरण हैं. कभी गृहिणी की भूमिका निभाने वाली प्रमिला पाटीदार ने अपने पति के मार्गदर्शन और सहयोग से उद्यमिता की राह चुनी और आज मेसर्स गंगा कावेरी इंडस्ट्रीज का सफल संचालन कर रही हैं.
इस इकाई में मुख्य रूप से मक्का पोहा यानी कॉर्न फ्लेक्स का निर्माण किया जाता है, जिसका उपयोग पशु आहार के रूप में किया जाता है. दिसंबर 2023 से इकाई लगातार उत्पादन कर रही है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ-साथ किसानों के लिए भी बाजार उपलब्ध कराने में योगदान दे रही है.
प्रमिला पाटीदार ने एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत अपनी इकाई में करीब ₹3.5 करोड़ का निवेश किया है. योजना के अंतर्गत उन्हें कुल निवेश पर 48 प्रतिशत तक अनुदान चार समान किश्तों में प्राप्त हुआ.इस आर्थिक सहायता ने उद्योग की स्थापना और संचालन में वित्तीय सहयोग प्रदान किया.
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मार्गदर्शन से योजना की प्रक्रिया पूरी की गई और इकाई को समय पर योजना का लाभ मिला.इससे प्रमिला पाटीदार को अपने उद्योग को आगे बढ़ाने में मदद मिली.
प्रमिला पाटीदार का उद्यमिता का सफर भी खासा प्रेरणादायक है.वह पहले गृहिणी थीं.उनके पति व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. पति को व्यापार करते हुए देखकर उन्होंने भी व्यवसाय की बारीकियों को समझना शुरू किया और स्वयं का उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया.
पति के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया.धीरे-धीरे उन्होंने उद्योग संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझा और आज वह स्वयं एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं.
गंगा कावेरी इंडस्ट्रीज में उत्पादन के लिए मुख्य कच्चे माल के रूप में मक्का का इस्तेमाल होता है. इससे आसपास के किसानों को अपनी मक्का उपज की खपत के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध हो रहा है.स्थानीय स्तर पर कृषि उपज की मांग बढ़ने से किसानों और उद्योग के बीच सीधा संबंध भी मजबूत हो रहा है. इस तरह यह इकाई कृषि और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में काम कर रही है.
इकाई में तैयार होने वाला पशु आहार केवल बड़वानी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य जिलों और राज्यों के पशुपालकों तक भी पहुंच रहा है.
गंगा कावेरी इंडस्ट्रीज उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी माध्यम बन रही है. इकाई के संचालन से करीब 20 से 25 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है. इससे स्थानीय परिवारों को आय का एक अतिरिक्त और स्थायी साधन मिल रहा है.
प्रमिला पाटीदार की कहानी यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही मार्गदर्शन और प्रभावी क्रियान्वयन महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है. गृहिणी से उद्यमी बनने का उनका सफर अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की प्रेरणा बन रहा है.
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