Mushroom Revolution: मशरूम उगाने में बिहार बना देश का नंबर-1 राज्य, 10 साल में 700 गुना से ज्यादा बढ़ा उत्पादन

Mushroom Revolution: मशरूम उगाने में बिहार बना देश का नंबर-1 राज्य, 10 साल में 700 गुना से ज्यादा बढ़ा उत्पादन

बिहार ने मशरूम उत्पादन में देश का नंबर-1 राज्य बनने का गौरव हासिल किया है. 2013-14 में जहां उत्पादन मात्र 0.06 हजार मीट्रिक टन था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 42.19 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया. सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, ट्रेनिंग और महिला किसानों की भागीदारी ने बिहार में मशरूम क्रांति को नई ऊंचाई दी है.

Mushroom farming at homeMushroom farming at home
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 31, 2026,
  • Updated Aug 31, 2026, 1:30 PM IST

कभी सीमित स्तर पर की जाने वाली मशरूम खेती आज बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है. मशरूम उत्पादन के मामले में बिहार ने देश में टॉप स्थान हासिल कर लिया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में बिहार ने देश के कुल मशरूम उत्पादन में लगभग 12.02 प्रतिशत योगदान दिया, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक राज्य बन गया.

भारत पहले ही मशरूम उत्पादन के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है और इस क्षेत्र में बिहार की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है.

10 साल में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी

बिहार में मशरूम उत्पादन की कहानी किसी कृषि क्रांति से कम नहीं है. वर्ष 2013-14 में राज्य का उत्पादन केवल 0.06 हजार मीट्रिक टन था. अगले दस वर्षों में इसमें जबरदस्त वृद्धि दर्ज हुई और 2023-24 तक उत्पादन बढ़कर 42.19 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया.

विशेषज्ञों के अनुसार इस अवधि में मशरूम उत्पादन की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 92.62 प्रतिशत रही, जो कृषि क्षेत्र में बेहद असाधारण मानी जाती है. यह आंकड़ा बताता है कि बिहार ने बहुत कम समय में मशरूम उत्पादन को बड़े उद्योग का रूप दे दिया है.

कैसे आई बिहार में 'मशरूम क्रांति'?

बिहार में मशरूम खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने लगातार कई योजनाएं लागू कीं. किसानों को प्रशिक्षण, सब्सिडी, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने की दिशा में बड़े कदम उठाए गए.

एक समय बिहार के मशरूम उत्पादन को करीब 28 हजार टन बताया जाता था, लेकिन 2023-24 के अंतिम अग्रिम अनुमान में उत्पादन 42.19 हजार मीट्रिक टन दर्ज किया गया. इससे स्पष्ट है कि पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन में तेजी से विस्तार हुआ है.

सरकार की योजनाओं ने बदली तस्वीर

बिहार सरकार के अलग-अलग कृषि रोडमैप और विशेष योजनाओं ने मशरूम खेती को नई दिशा दी है. इसका फायदा स्थानीय किसानों को मिला है और वे मशरूम की खेती में पहले से अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं.

प्रमुख योजनाएं

बिहार कृषि रोडमैप (Phase-II, 2012-17)-  मशरूम उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा दिया गया.

बिहार कृषि रोडमैप (Phase-III, 2017-22)- एकीकृत मशरूम यूनिट, महिलाओं के समूह और उत्पादन विस्तार पर जोर दिया गया.

इंटीग्रेटेड मशरूम डेवलपमेंट यूनिट (2017)- स्पॉन उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए.

क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट पहल (2019)- धान के पुआल का उपयोग मशरूम उत्पादन में करने को प्रोत्साहन मिला.

मशरूम किट वितरण योजना (2023)- किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर मशरूम किट उपलब्ध कराई गई.

एकीकृत बागवानी विकास योजना (2023)- मशरूम इकाइयों के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी और 10 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया.

मशरूम हट उत्पादन योजना (2023-24)- मशरूम उत्पादन शेड बनाने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई.

कृषि रोडमैप फेज-IV (2023-28)- मशरूम को आय, रोजगार और पोषण बढ़ाने वाले प्रमुख कृषि उद्यम के रूप में शामिल किया गया.

महिलाओं ने भी लिखी सफलता की कहानी

बिहार की मशरूम क्रांति में महिला किसानों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है. प्रशिक्षण कार्यक्रमों और स्वयं सहायता समूहों की मदद से बड़ी संख्या में महिलाएं मशरूम उत्पादन से जुड़ रही हैं.

बांका जिले की बिनीता कुमारी इसका प्रमुख उदाहरण हैं. कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन और मार्केटिंग का सफल मॉडल तैयार किया. बाद में उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इस बिजनेस से जोड़ा. आज उनके समूह की महिलाएं रेगुलर कमाई कर रही हैं. उनके बेहतर काम के लिए उन्हें "मशरूम प्रोडक्शन ग्रोवर्स अवॉर्ड" भी दिया जा चुका है.

किसानों की आय बढ़ाने का बना नया जरिया

मशरूम खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कम जमीन, कम पानी और सीमित निवेश में शुरू किया जा सकता है. यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान तेजी से इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

विशेष रूप से ऑयस्टर और बटन मशरूम के उत्पादन में बिहार ने अच्छी पहचान बनाई है. इससे किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है.

आगे क्या है सरकार की योजना?

राज्य सरकार अब मशरूम उत्पादन को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है. इसके तहत पूरे राज्यभर में आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएंगी. भंडारण सुविधाओं का विस्तार होगा, किसान उत्पादक समूहों और क्लस्टर बनाए जाएंगे. बाजार से बेहतर जुड़ाव तेजी से बढ़ाया जाएगा और औषधीय मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही तो बिहार आने वाले वर्षों में न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक मशरूम उद्योग में भी एक मजबूत पहचान बना सकता है. मशरूम खेती किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार पैदा करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है.

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