बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने की तैयारी के बीच सरकार गन्ना उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है. इसके लिए उच्च उत्पादकता वाली Co 0238 (करण-4) गन्ना किस्म और सेमी-पेरेनियल खेती पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस तकनीक से किसान 18 महीनों में एक ही खेत से दो फसलें ले सकते हैं, जबकि Co 0238 किस्म अधिक पैदावार, बेहतर चीनी रिकवरी और अच्छी क्वालिटी के गुड़ के लिए देशभर में लोकप्रिय हो चुकी है.
बिहार में सामान्य से कम बारिश के कारण अब तक केवल 12% क्षेत्र में धान की रोपनी हो सकी है, जबकि 90% नर्सरी तैयार है. आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनूप दास ने किसानों के लिए सलाह जारी की है.
बिहार में मॉनसून की रफ्तार धीमी रहने और पर्याप्त बारिश नहीं होने के बीच डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वैज्ञानिकों ने किसानों को तिल, मक्का और अरहर जैसी खरीफ फसलों की खेती करने की सलाह दी है. पानी की कमी वाले ऊंचे क्षेत्रों में मध्य जुलाई तक तिल की बुवाई की जा सकती है, जबकि मक्का और अरहर की खेती के लिए भी यह समय उपयुक्त माना गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश की स्थिति में ये फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं.
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