बिहार में चना की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. प्रदेश में चने का रकबा बढ़ाने और आमदनी में इजाफा करने के लिए बिहार सरकार चने की खेती पर 4000 रुपये की सहायता दे रही है. इस रिपोर्ट में पूरी डिटेल्स.
बिहार के मशहूर मगही पान को GI टैग मिलने के बाद किसानों को बड़ा फायदा मिलने लगा है. नवादा और नालंदा के 1001 किसानों ने GI अधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया है. सामूहिक ब्रांडिंग और मार्केटिंग के चलते मगही पान के दाम 120-140 रुपये प्रति ढोली से बढ़कर 280-300 रुपये तक पहुंच गए हैं.
बिहार सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए 48 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष से 6 लाख हेक्टेयर अधिक है. गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती बढ़ाने के साथ किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाने और पंचायत स्तर तक निगरानी की व्यवस्था की जा रही है.
बिहार के कैमूर और रोहतास जिले के किसानों का कहना है कि सब्जी और आलू की खेती में अच्छी कमाई की संभावना होने के बावजूद बाजार और उचित दाम की कमी उन्हें बड़े पैमाने पर खेती करने से रोक रही है. किसानों ने मंडी व्यवस्था में सुधार, पंचायत स्तर पर कृषि वैज्ञानिकों की तैनाती और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके.
बिहार सरकार ने पटना के प्रसिद्ध दीघा दुधिया मालदा आम के संरक्षण के लिए ₹1.30 करोड़ की मंजूरी दी है. जानें जर्मप्लाज्म संरक्षण, जीन बैंक और GI टैग की पूरी योजना.
बिहार में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन पर दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने की तैयारी है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जिलावार और प्रखंडवार संभावित क्षेत्रों की पहचान कर कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं.
बिहार में मॉनसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 31 फीसदी कम बारिश हुई है. इसके बावजूद वापसी के समय गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में फिर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. पश्चिमी चंपारण समेत कई इलाकों में तटबंध क्षतिग्रस्त होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
बिहार में धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग उठी है. राज्य के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र भेजकर खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए लक्ष्य में 15 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की मांग की है.
बिहार में चक्रवात अर्णव के असर से हुई तेज बारिश और जलभराव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. धान, मक्का, गन्ना, सब्जियों के साथ केला और पपीते की फसल को भी नुकसान का खतरा है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि सबसे पहले खेत से पानी निकालें, फसल की जांच करें और अगले कुछ हफ्तों तक रोग और सड़न के लक्षणों पर नजर रखें.
नवगछिया के रंगरा प्रखंड के सधुवा और चापर गांव में कोसी और गंगा के बाढ़ के पानी से सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का की फसल बर्बाद हो गई है. किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी. अब किसान प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं.
बिहार में बाढ़ से खेतों में खड़ी फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों का स्थल निरीक्षण कर वास्तविक फसल क्षति की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
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