EL-Nino: कम बारिश, तेज गर्मी बिगाड़ सकती है पशुओं का हाजमा, करें ये काम 

EL-Nino: कम बारिश, तेज गर्मी बिगाड़ सकती है पशुओं का हाजमा, करें ये काम 

पशुओं की पेट से जुड़ी कई बीमारियों में मीठा सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) फायदेमंद है, लेकिन ये भी सलाह दी जाती है कि हर बात में मीठा सोडा नहीं खि‍लाया जाए. अगर आप गाय-भैंस को मीठा सोडा खि‍ला रहे हैं तो बहुत ही कम मात्रा से शुरुआत करें. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 15, 2026,
  • Updated Jun 15, 2026, 1:04 PM IST

अगर जून महीने में आपको मौसम में अचानक से बदलाव दिखाई देने लगे तो परेशान न हों. मौसम को लेकर ऐसी चेतावनी आ रही है कि भारत के मौसम पर अल नीनो का असर दिखाई दे सकता है. अल नीनो के असर से होता ये है कि गर्मी तेज पड़ने लगती है, वहीं बारिश कम हो जाती है. इस तरह का मौसम पशुपालकों को बहुत परेशान करता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इस तरह का मौसम पशुओं की भूख और उनके हाजमें पर असर डालता है. पशुओं का पेट खराब हो सकता है. मौसमी तनाव के चलते पशुओं की भूख तक कम हो जाती है. इसका असर पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है. उत्पादन कम होने के साथ ही दूध में फैट अच्छी नहीं आती है. 

यहां तक की दूध में एसएनएफ की मात्रा बनना भी कम हो जाती है. ऐसे में एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पशुओं को मीठा सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) खि‍लाया जा सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे भी ज्यादातर पशुपालकों के लिए फौरी तौर पर गाय-भैंस की पेट संबंधी बीमारी के लिए सिर्फ एक दवाई मीठा सोडा होती है. लेकिन इसे खि‍लाने से पहले अलर्ट हो जाएं. क्योंकि मीठा सोडा जितना फायदेमंद हैं उतना ही नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. जरूरत से ज्यादा और बिना डॉक्टरी सलाह के मीठा सोडा नहीं खि‍लाना चाहिए. 

मीठा सोडा के फायदे

दुधारू पशुओं के लिए मीठा सोडा बहुत ही उपयोगी माना जाता है. पशुपालन में इसका इस्तेमाल खासतौर पर पशु के पाचन को सुधारने और दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किया जाता है.

  • जब गाय-भैंस या भेड़-बकरी ज्यादा दाना या अनाज खा लेते हैं तो एसिडिटी बढ़ जाती है. मीठा सोडा इस एसिडिटी को कम करके पेट का pH लेवल संतुलित रखता है.
  • पशु का पाचन सही रहता है तो उसके दूध में फैट भी अच्छी मात्रा में बनता है. 
  • पशु की खुराक कम हो रही है या जुगाली कम कर रहा है, तो मीठा सोडा देने से उसकी भूख और खाने की क्षमता बढ़ती है.
  •  पेट में गैस बनने या पेट फूलने जिसे अफरा भी कहा जाता है की परेशानी मीठा सोडा देने से ठीक हो जाती है. 
  • एसिडिटी की वजह से पशु को दस्त हो गए हैं, गोबर पतला कर रहा है, तो मीठा सोडा दे सकते हैं.

मीठा सोडा खि‍लाने का तरीका 

  • एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक मीठा सोडा खि‍लाने की का वक्त और उसकी मात्रा हमेशा पशु की स्थिति और उसकी डाइट के हिसाब से तय की जाती है. 
  •  सामान्य हालात में 30 से 50 ग्राम रोजाना दाना मिश्रण में मिलाकर खि‍लाया जा सकता है. 
  •  एक्सपर्ट की सलाह पर  ज्यादा दूध देने वाले पशुओं को 50 से 100 ग्राम तक दे सकते हैं. 
  • अफारा या गैस होने पर 100 ग्राम मीठा सोडा तेल या पानी के साथ घोल बनाकर दे सकते हैं. 

कब ज्यादा जरूरी होता है मीठा सोडा 

  • जब पशु की खुराक में शामिल दाना अचानक बदला जा रहा हो. 
  • जब पशुओं की खुराक में अनाज, खली ज्यादा और हरा चारा कम हो.
  • अगर पशु जुगाली कम कर रहा है तो उसे मीठा सोडा दे सकते हैं. 

खि‍लाने में बरतें ये सावधानियां 

लगातार मीठा सोडा न खि‍लाएं, जब पशु को ज्यादा दाना खि‍लाया जा रहा हो या पाचन की परेशानी हो. 
पशुओं को साधारण नमक खि‍ला रहे हैं तो सोडे की मात्रा का ध्यान रखें, जिससे शरीर में सोडियम का संतुलन न बिगड़े.
पशु गाभि‍न है या कोई दूसरी गंभीर बीमारी है तो डॉक्टरी सलाह पर ही मीठा सोडा खि‍लाएं. 

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