
बड़ा पशु गाय-भैंस हो या छोटा पशु भेड़-बकरी, सभी को दूध-मीट और बच्चों के लिए पाला जाता है. इसी को एनिमल प्रोडक्ट भी कहा जाता है. दूध बेचकर तो पशुपालक हर रोज गुजारे लायक मुनाफा कमाता है, लेकिन बच्चे बेचकर होने वाली इनकम पशुपालकों के लिए बड़ी बचत होती है. बच्चों से ही बाड़े में पशुओं की संख्या भी बढ़ती है. यही वजह है कि हर पशुपालक की चाहत होती है कि उसकी बकरी साल में दो बार वक्त से बच्चा दे. वहीं गाय-भैंस को लेकर भी पशुपालक ऐसा ही सोचते हैं. जिस दूध का उत्पादन हो वो ज्यादा फैट वाला हो और बच्चे पैदा हों तो उनकी ग्रोथ अच्छी और तेजी से हो.
लेकिन ये तभी मुमकिन है जब छोटे-बड़े सभी तरह के पशुओं को उनकी खुराक में कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन दिया जाए. एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट का कहना है कि गाय-भैंस से भरपूर उत्पादन लेने के लिए जरूरी है कि उनकी दिनभर की खुराक में वो तीन चीजें जरूर शामिल की जाएं जो पशुओं को हेल्दी रखने के साथ ही उनके उत्पादन को भी बढ़ाती हैं. जैसे हरा चारा, सूखा चारा और मिनरल मिक्चर. और पशुओं को कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन भी इसी से मिलेगा.
कार्बोहाइड्रेट शरीर को एनर्जी देता है. और अच्छी बात ये है कि पशुओं के चारे में इसकी मात्रा सबसे ज्यादा होती है. यह हरा चारा, भूसा, कड़वी और मिनरल मिक्चर में खूब पाया जाता है.
प्रोटीन शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाने में अहम रोल निभाता है. शरीर के मसल्स को ताकत प्रोटीन से ही मिलती है. इतना ही नहीं शरीर की ग्रोथ, गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ और दूध उत्पादन के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है. अगर पशु के लिए प्रोटीन की बात करें तो ये खासतौर पर खल, दालों, फलीदार चारे जैसे बरसीम, रिजका, लोबिया, ग्वार आदि से मिलता है.
पानी में न घुलने वाले चिकने पदार्थ जैसे घी, तेल आदि को वसा कहा जाता है. शरीर के लिए वसा बहुत जरूरी होता है. वसा खासतौर पर त्वचा के नीचे या अन्य स्थानों पर जमा होकर एनर्जी स्टोर के रूप में काम करता है. भोजन की कमी के दौरान वसा ही एनर्जी की पूर्ति करता है. इसलिए पशु की खुराक में करीब तीन से पांच फीसद वसा जरूर शामिल करना चाहिए. पशु को वसा चारे और दाने से आसानी से मिल जाता है. पशु को अलग से वसा देने की जरूरत नहीं है. वसा खासतौर पर बिनौला, तिलहन, सोयाबीन और अलग-अलग तरह की खल से मिल जाता है.
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