
उत्तर भारत के कई राज्यों में रुक-रुककर बारिश हो रही है. ओले भी गिर रहे हैं. मौसम में इस तरह के बदलाव के बाद पशुपालकों को अलर्ट रहने की जरूरत है. खासतौर से हरे चारे और पानी को लेकर. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो बारिश होते ही हरा चारा गीला हो जाता है. चारे में मिट्टी लग जाती है. वहीं पानी भी दूषित हो जाता है. अगर पशु इस तरह का हरा चारा खा लेता, या दूषित पानी पी लेता है तो उसे पेट संबंधी परेशानियां बढ़ जाती है. जिसका सीधा असर उत्पादन और प्रजनन पर पड़ता है.
एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि दूध और मीट का उत्पादन करने वाला पशु छोटा हो या बड़ा पानी के चलते होने वाली बीमारियां सभी को परेशान करती हैं. खासतौर से पेट में होने वाले कीड़ों की परेशानी. कई बार दूषित चारा और दूषित पानी पीने के चलते छोटे-बड़े सभी पशु इसकी चपेट में आ जाते हैं. और जब पशु के पेट में कीड़े होते हैं तो उसका असर दूध-मीट के उत्पादन समेत पशुओं के प्रजनन पर भी पड़ता है.
गाय-भैंस, भेड़-बकरियों के पेट में कीड़े होना आम बात है. हरा चारा खिलाने और पीने पिलाने में अगर जरा सी भी लापरवाही हो जाए तो ये परेशानी खड़ी हो जाती है. इसलिए इससे बचने का उपाय ये ही है कि बरसात के दौरान पशुओं को देखभाल को लेकर ज्यादा अलर्ट हो जाएं.
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