
ठंड यानि की जाड़ों के मौसम में मछली पालन मंदा हो जाता है. इसकी वजह है तापमान कम होता चला जाता है. सूरज की रोशनी भी कम हो जाती है. सूरज की रोशनी न होने से पानी में ऑक्सीजन कम हो जाती है. सुबह-शाम का कोहरा भी बहुत होता है. ये सब वो वजह हैं जिसके चलते तालाब में मछलियों की प्राकृतिक खुराक बनाने की स्पीड कम हो जाती है. जिसके चलते मछलियों की ग्रोथ धीमी हो जाती है. ऑक्सीजन लेवल कम होने से मछलियां ऊपर तल पर सांस लेने के लिए मजबूर हो जाती हैं.
ऐसा करने से वो ठंड पानी के संपर्क में आ जाती है. मछलियां बीमार पड़ने लगती हैं. मछलियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है. मछलियों का पाचन सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिसके चलते वो खाना कम या एकदम से बंद कर देती हैं. जनवरी तक मछलियों को ज्यादा ठंड लगती है. मछलियों को ठंड लग रही है इसका पता ऐसे चलता है कि ठंड लगने के दौरान मछलियां पानी में अपनी जगह बदल लेती हैं.
ठंड के मौसम में मछलियों को हर रोज दी जाने वाली खुराक का सिर्फ एक तिहाई फीड ही दें.
मछलियों की जितनी खुराक है उसे दिन में सिर्फ एक बार ही दें.
मछलियों को दोपहर के वक्त धूप निकलने पर ही फीड खाने को दें.
मछलियों को फीड देने के दो घंटे बाद चेक कर लें कि फीड खत्म हुआ है या नहीं. अगर बचा हो तो अगले दिन फीड की मात्रा कम कर दें.
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