Cage Culture Fisheries कामयाब हो रहा है मछली पालन में मुनाफा डबल करने का ये तरीका 

Cage Culture Fisheries कामयाब हो रहा है मछली पालन में मुनाफा डबल करने का ये तरीका 

Cage Culture Fisheries देशभर में 19 हजार वाटर बॉडीज (जलाशय) ऐसे हैं जहां केज कल्चर तकनीक की मदद से मछली पालन किया जा सकता है. तालाब के मुकाबले ये एक सस्ता माध्यम है. हालांकि अभी देश में केज तकनीक की मदद से जलाशयों में मछली पालन न के बराबर ही हो रहा है. लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर तमाम तरह सब्सि‍डी देकर केज तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं.

  • New Delhi,
  • Jan 27, 2026,
  • Updated Jan 27, 2026, 4:32 PM IST

मछली पालन में केज कल्चर तेजी से बढ़ रहा है. खासतौर पर ग्रामीण और आदिवासों इलाकों में केज कल्चर की तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है. केन्द्र और राज्य सरकार भी केज कल्चर के लिए मोटी सब्सि डी दे रही हैं. केन्द्रीय मंत्रालय के आंकड़ों पर जाएं तो देशभर के जलाशयों में करीब 35 लाख हेक्टेयर जगह ऐसी है जहां केज तकनीक की मदद से मछली पालन किया जा सकता है. केन्द्र और राज्य सरकारों ने इसके 9 बड़े फायदे भी बताए हैं. फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि जरूरी नहीं कि तालाब बनाकर ही मछली पालन किया जाए. अगर आपके गांव या शहर के आसपास कहीं भी जलाशय है तो आप वहां कम लागत में मछली पालन कर सकते हैं. केज तकनीक का इस्तेमाल कर किसी भी जलाशय में मछली पालन किया जा सकता है. 

इसके लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत केन्द्र सरकार मदद करती है. राज्य सरकारें भी वित्तीय मदद करती हैं. और सबसे बड़ी बात ये है कि इसके चलते डैम, कोल और स्टोन पिट्स का इस्तेमाल भी हो जाता है. केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर मछली का बीज खरीदने, उन्हें खि‍लाने के लिए फीड खरीदने तक पर मछली पालकों को सब्सिडी दी जा रही है. यहां तक की केज की मरम्मत के लिए भी मदद दी जा रही है.

ये हैं केज तकनीक से मछली पालन के फायदे

  • केज में गहन पालन, उच्च स्टॉकिंग घनत्व और मछलियों को अनुकूलित आहार प्राप्त होता है.
  • एक केज से सालाना तीन से चार टन तक मछली उत्पादन होता है. 
  • केज तकनीक से जलाशयों का अच्छी और पूरी तरह से इस्तेमाल हो जाता है. 
  • केज तकनीक से जमीनी तालाब कम होने से पर्यावरण संतुलन बना रहता है. 
  • केज में खासतौर से पंगेसियस, तिलापिया और भारतीय मेजर कार्प जैसी उच्च-मूल्यवान प्रजातियों की खेती की जा सकती है, जिससे अच्छी इनकम होती है. 
  • केज से मछली पालन, फीड सप्लाई, जाल निर्माण, रखरखाव, कटाई-मार्केटिंग नौकरी पैदा होती है. 
  • केज का इस्तेमाल बीज उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है.
  • केज को जरूरत और सुविधा के हिसाब से ट्रांसफर भी किया जा सकता है. 
  • केज तकनीक से उत्पादन बढ़ता है और वैराइटी भी बढ़ जाती हैं.
  • केज तकनीक स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के रूप में मछली पालन को बढ़ावा देती है.

केज कल्चर मछली पालन के कहां-कितने हैं मौके 

  • झारखंड 115,514
  • मध्य प्रदेश 601,604
  • कर्नाटक 485,662
  • राजस्थान 400,298
  • गुजरात 347,875
  • उत्तर प्रदेश 334,840
  • महाराष्ट्र 229,591
  • ओडिशा 200,379
  • तेलंगाना 191,000
  • तमिलनाडु 127,952

नोट- आंकड़े हेक्टेयर में हैं.

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