
मछली पालन में केज कल्चर तेजी से बढ़ रहा है. खासतौर पर ग्रामीण और आदिवासों इलाकों में केज कल्चर की तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है. केन्द्र और राज्य सरकार भी केज कल्चर के लिए मोटी सब्सि डी दे रही हैं. केन्द्रीय मंत्रालय के आंकड़ों पर जाएं तो देशभर के जलाशयों में करीब 35 लाख हेक्टेयर जगह ऐसी है जहां केज तकनीक की मदद से मछली पालन किया जा सकता है. केन्द्र और राज्य सरकारों ने इसके 9 बड़े फायदे भी बताए हैं. फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि जरूरी नहीं कि तालाब बनाकर ही मछली पालन किया जाए. अगर आपके गांव या शहर के आसपास कहीं भी जलाशय है तो आप वहां कम लागत में मछली पालन कर सकते हैं. केज तकनीक का इस्तेमाल कर किसी भी जलाशय में मछली पालन किया जा सकता है.
इसके लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत केन्द्र सरकार मदद करती है. राज्य सरकारें भी वित्तीय मदद करती हैं. और सबसे बड़ी बात ये है कि इसके चलते डैम, कोल और स्टोन पिट्स का इस्तेमाल भी हो जाता है. केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर मछली का बीज खरीदने, उन्हें खिलाने के लिए फीड खरीदने तक पर मछली पालकों को सब्सिडी दी जा रही है. यहां तक की केज की मरम्मत के लिए भी मदद दी जा रही है.
नोट- आंकड़े हेक्टेयर में हैं.
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