
एनिमल प्रोडक्ट के अच्छे दाम तब मिलते हैं जब वो बीमारियों से फ्री हो. बाजार में डिमांड भी तभी आती है जब ग्राहक को ये यकीन हो कि जो एनिमल प्रोडक्ट खरीद रहा है वो बीमारी से मुक्त है. इसी के चलते पशुओं की बीमारी और संक्रमण पर बहुत ध्यान देने को कहा जाता है. पशुओं का वैक्सीनेशन भी इसीलिए कराया जाता है. अब तो एक्सपोर्ट मार्केट ही नहीं घरेलू बाजार में भी एनिमल प्रोडक्ट दूध, दूध से बने प्रोडक्ट, अंडा, चिकन, मछली और मीट खरीदने से पहले ये तसल्ली कर लेना चाहते हैं कि संबंधित पशुओं का वैक्सीनेशन हुआ है या नहीं. एक्सपोर्ट मार्केट और घरेलू बाजार में डिमांड बढ़ाने के लिए जरूरी है कि पशुओं का जरूरत के हिसाब से वक्त पर वैक्सीनेशन कराया जाए. दूध के मामले में हम पहले से ही नंबर वन है. वहीं अंडा उत्पादन में हम तीसरे से दूसरे नंबर पर आ गए हैं.
मीट में भी आठवें से एकदम पांचवें नंबर पर आ गए हैं. ये बात अलग है कि एक्सपोर्ट की मात्रा बहुत ही कम है. और इसकी वजह है पशुओं की बीमारी. लेकिन, अगर हम वक्त से पशुओं का टीकाकरण कराएं तो एक्सपोर्ट को भी बढ़ाया जा सकता है. आज ज्यादातर देश एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) फ्री एनिमल प्रोडक्ट की डिमांड कर रहे हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक इसका एक मात्र इलाज ये है कि पशुओं को एंटी बायोटिक दवाई खाने को न दी जाए. और ये तभी मुमकिन है जब पशु बीमार न हों.
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