Calf Care after Birth: बछड़ों के लिए नुकसानदायक है ये बदलता मौसम, जान भी ले सकती हैं तीन बड़ी बीमारियां 

Calf Care after Birth: बछड़ों के लिए नुकसानदायक है ये बदलता मौसम, जान भी ले सकती हैं तीन बड़ी बीमारियां 

Calf Care after Birth गाय-भैंस बच्चा दे और वो अगर बछिया है तो फिर पशुपालक के लिए दोहरी खुशी होती है. क्योंकि पशुपालन में दूध ही नहीं जन्म लेने वाला बछड़ा भी मुनाफा कराता है. लेकिन मुनाफा भी तब होता है जब बछड़ा कम से कम एक साल का हो जाए. क्योंकि बछड़े के जन्म लेने के बाद करीब छह महीने उसके लिए बहुत जोखि‍म भरे होते हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 23, 2026,
  • Updated Mar 23, 2026, 9:51 AM IST

पैदा होने वाला बछड़ा किसी भी छोटे-बड़े पशुपालक के लिए बोनस जैसा होता है. दूध बेचकर तो पशुपालक मुनाफा कमाता ही है, लेकिन बड़े होकर बछड़ा उसके लिए अतिरिक्त मुनाफा बन जाता है. बछड़ा अगर फीमेल है तो बड़े होकर दूध देता है, और अगर मेल है तो एक से डेढ़ की उम्र पर उसे बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा सकता है. लेकिन पशुपालन की ये भी बड़ी सच्चाई है कि बछड़े को पालना आसान नहीं होता है. जन्म से लेकर छह महीने उसके लिए बहुत ही जोखि‍म भरे होते हैं. इस दौरान बछड़ा कई तरह के संक्रमण की चपेट में तो आता ही है, साथ में मौसमी बीमारियां भी उस पर अटैक करती हैं. 

इतना ही नहीं मौजूदा बदलता मौसम तो बछड़ों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. एक तो ठंडा मौसम और ऊपर से कभी ठंडा तो कभी गर्म वाली मौसम की अठखे‍लियां. ठंड के चलते बछड़ों का तनाव भी बढ़ जाता है. साथ ही तीन खास तरह की बीमारियां भी घेर लेती हैं, जिस पर अगर ध्यान नहीं दिया गया तो बछड़ों की मौत तक हो सकती है. बछड़ों को इन तीन बीमारियों से बचाने के लिए डाक्टरी सलाह के साथ-साथ घरेलू उपाय भी अपनाए जा सकते हैं. 

दस्त से बचाना है जरूरी

बदलते मौसम में बछड़ों को अक्सर दस्त होने की परेशानी सामने आती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो ज्यादा दूध पिलाने के चलते बछड़ों को दस्त लग जाते हैं. इसकी एक बड़ी वजह पेट में कीड़े होना भी है. साथ ही पेट के दूसरे संक्रमण के चलते भी बछड़ों को दस्त हो जाते हैं. इसीलिए पशुपालकों को ये सलाह दी जाती है कि जन्म के फौरन बाद बछड़ों को खीस (कोलोस्ट्रम) पिलाना चाहिए.

जब परेशानी ज्यादा बढ़ने लगे तो डाक्टर की सलाह पर मुंह के रास्ते या इंजेक्शन से एंटीबायोटिक और एंटीबैक्टीरियल दवाई देनी चाहिए. अगर दस्त के साथ ब्लड भी आने लगे तो फौरन ही डाक्टर को दिखाएं ये कोक्सीडियोसिस बीमारी भी हो सकती है.

बछड़ों के लिए जानलेवा है निमोनिया 

बदलते ठंडे-गर्म मौसम में बछड़ों को निमोनिया होने का डर भी लगा रहता है. निमोनिया के चलते बछड़ों को बुखार आने लगता है और सांस लेने में परेशानी होती है. यही परेशानी बछड़ों की मौत की वजह भी बनती है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशु शेड में नियमानुसार हवा आने-जाने के लिए खिड़की का ना होना भी निमोनिया की वजह है. 

खतरनाक है बुखार के साथ खूनी दस्त 

बछड़ों को बुखार के साथ खूनी दस्त लगना एक बड़ी परेशानी है. कई बार तो जरा सी लापरवाही के चलते इसके चलते बछड़ों की मौत तक हो जाती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इस बीमारी को साल्मोनेलोसिस कहा जाता है. ऐसा होने पर घरेलू उपाय करने के वजाए सीधे डाक्टर को दिखाएं. इस बीमारी के इलाज में अक्सर एंटीबायोटिक और एंटीबैक्टीरियल दवाई दी जाती है.

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