
आजकल बकरों की जमकर खरीद हो रही है. बकरीद पर कुर्बानी के लिए बकरे खरीदे जा रहे हैं. तीन दिन तक बकरों की कुर्बानी दी जाती है. इसके लिए साप्ताहिक हाट और बाजारों से बकरे खरीदे जा रहे हैं. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि बकरों की बिना किसी जांच-पड़ताल के खरीद-फरोख्त हो रही है. बकरों को बीमारियों के टीके लगे हैं या नहीं ये भी नहीं बताया जाता है. हालांकि दूसरे पशुओं के मुकाबले बकरे हार्ड इम्यूनिटी वाले माने जाते हैं. गाय-भैंस को कोई भी बीमारी जल्दी लग सकती है. लेकिन बकरे-बकरी जल्द बीमारी की चपेट में नहीं आते हैं. गोट एक्सपर्ट की मानें तो बीमारियों के बचे हुए जोखिम को भी वक्त से वैक्सीनेशन करा कर खत्म और कंट्रोल किया जा सकता है.
लेकिन जरूरी है कि सभी टीके वक्त से लग जाएं. हर एक टीके के लगने का वक्त तय है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के मुताबिक खुरपका-मुंहपका (एफएमडी), बकरी की चेचक, बकरी की प्लेग जैसी बीमारियों समेत पैरासाइट से बकरे-बकरियां बीमारी और संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. बीमार बकरे का मीट का मीट खाने से खाने वाला भी बीमारी की चपेट में आ सकता है. खासतौर पर एफएमडी बीमारी तो जानलेवा हो सकती है.
ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल
ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2