
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास राज्य के डेयरी क्षेत्र की "जबरदस्त क्षमता" का लाभ उठाने की एक महत्वाकांक्षी योजना है. INDIA TODAY के वरिष्ठ संपादक राहुल नरोन्हा को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "दूध उत्पादन से जुड़ा कोई भी समुदाय—चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो, इससे लाभान्वित होगा."
Q. आपने घोषणा की है कि मध्य प्रदेश में दूध का उत्पादन, जो अभी देश के कुल उत्पादन का 9 प्रतिशत है, उसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाएगा. आप इसे कैसे हासिल करने की योजना बना रहे हैं?
A. जब हमने पिछले साल राज्य की दुग्ध सहकारी संस्था को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को सौंपा था, तब रोजाना दूध का कलेक्शन 9,55,000 लीटर था, और अब यह बढ़कर 11.7 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है. हम इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, ताकि अंत में हम 50 लाख लीटर प्रतिदिन के लक्ष्य तक पहुंच सकें.
राज्य में दूध का उत्पादन काफी अधिक है, जो लगभग 550 लाख लीटर प्रतिदिन है. यही कारण है कि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं. सहकारी समिति द्वारा डेयरी किसानों को दी जाने वाली राशि में 5-8 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है, जिससे उन्हें काफी मदद मिली है. इस क्षेत्र के विकास के लिए हम एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहे हैं.
Q. BJP-शासित कई राज्य गायों की सुरक्षा के लिए गायों के कल्याण और गौशाला मॉडल पर ज्यादा ध्यान देते हैं. आपका नजरिया ज्यादातर आर्थिक पहलुओं पर आधारित लगता है.
A. हां, यह सच है. गायों की सुरक्षा के लिए हम सिर्फ दान और धर्म पर निर्भर नहीं रह सकते, हमें आत्मनिर्भर बनना होगा. हमारा ध्यान नस्ल सुधार, मवेशियों के लिए सही और पौष्टिक आहार, और प्रोसेसिंग यूनिट्स को आधुनिक बनाने पर है. हमें बाजार पर भी नजर रखनी होगी. हम छोटे किसानों की आय का स्तर बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहे हैं.
Q. क्या पशुपालन विभाग को अपने सभी खर्चों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बजट की सहायता मिल रही है?
A. हां. गौशालाओं को खर्चों के लिए, पहले के 20 रुपये के मुकाबले, अब प्रति गाय 40 रुपये मिलेंगे. अब गौशालाओं के लिए 100 एकड़ तक जमीन आवंटित करने की नीति है.
Q. विशेषज्ञों का मानना है कि डेयरी क्षेत्र पर आपका ध्यान अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने को लेकर है, क्योंकि आप ऐसे समुदाय से आते हैं जो पशुपालन के काम में लगा हुआ है.
A. मैं आपको आसान शब्दों में एक बात बताता हूं: 'गोपाल' कौन है? कोई भी व्यक्ति जिसके पास गाय है, वह गोपाल है. खेती-बाड़ी से जुड़े सभी समुदाय पशु भी पालते हैं और उनसे कमाई भी करते हैं. दूध उत्पादन से जुड़ा कोई भी समुदाय—चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो—इस क्षेत्र के विकास से लाभान्वित होगा. दूध कुपोषण की समस्या से निपटने में भी मददगार साबित होगा.
Q. गौशाला-आधारित तरीका, जिसके तहत आवारा पशुओं को रखा और खिलाया जाता है, कारगर साबित होता नहीं दिख रहा है. आवारा पशु किसानों के लिए एक बड़ी समस्या हैं. क्या यह एक अच्छा विचार नहीं होगा कि किसानों को अपने खेतों की बाड़ लगाने के लिए सब्सिडी दी जाए?
A. नहीं, ऐसा नहीं किया जा सकता. हमारे राज्य में, यहां तक कि जो लोग बाघों वाले नेशनल पार्क के पास रहते हैं, उन्हें भी प्रकृति के साथ मिलकर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. उन्हें भी बाड़ की जरूरत नहीं पड़ती. हमारा समाज पुलिस-आधारित समाज नहीं है.
Q. लेकिन अगर जंगली जानवरों से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचता है, तो उन्हें मुआवजा देने का प्रावधान है.
A. हां, वह व्यवस्था मौजूद है. लेकिन गायों को कभी भी बिना देखभाल के नहीं छोड़ा जाता, सिवाय इसके कि जब मालिक सचमुच कुछ खास वजहों से मजबूर हो. ऐसे मामलों में, स्थानीय निकायों को गायों को रखने के लिए गौशालाएं खोलने का अधिकार दिया गया है. हम इन गौशालाओं को फंड देते हैं, क्योंकि यह गाय की सेवा है.