
ऊंटनी के दूध को सिर्फ एक दूध के रूप में नहीं देखा जाता है. ऊंटनी के दूध का इस्तेमाल चाय-कॉफी से ज्यादा दवाई के लिए किया जाता है. यही वजह है कि लोगों के बीच ऊंटनी के दूध को लेकर कई तरह के सवाल रहते हैं. जैसे अगर मौजूदा मौसम की बात करें तो इससे जोड़कर भी बहुत सारे लोग सवाल पूछते हैं. गर्मी के मौसम में ऊंटनी के दूध को कितनी देर रखा जा सकता है. ऊंटनी का दूध गर्मी में पिया जा सकता है या नहीं.
क्या कुछ खास बीमारियों में ऊंटनी के दूध को कच्चा ही पीना चाहिए. क्या ऊंटनी के दूध का दही बनाकर खाया जा सकता है. प्रोसेसिंग किए गए ऊंटनी के दूध को क्या पीना चाहिए. ये वो सवाल हैं जिनके जवाब हर वो इंसान जानना चाहता है जो गर्मी में ऊंटनी का दूध इस्तेमाल करना चाहता है.
उत्तर- ऊंट के दूध को भी अन्य दूध की तुलना में कमरे के तापमान पर लम्बे वक्त तक रखा जा सकता है. साइंटिस्ट का कहना है कि ऊंट के ताजे दूध को 30°C पर 8 घंटे तक रखा जा सकता है, पाश्चुरीकृत ऊंट के दूध को 4ºC पर 10 दिनों से अधिक समय तक रखा जा सकता है. और जब दूध में लैक्टोपेरोक्सिडेस सिस्टम सक्रिय होता है, तो ताजा दूध को 30ºC पर लगभग 20 घंटे तक रखा जा सकता है.
उत्तर- ऊंटनी का दूध पीने से दस्त नहीं होते हैं, लेकिन यह कुछ हद तक पाचक प्रभाव डालता है और मल त्याग में मदद करता है.
उत्तर- ऊंटनी के दूध से दही बनाने के दौरान ऊंटनी के दूध में फॉर्मेंटेशन होता है. इसके चलते अन्य दूध की तुलना में इस बनने में ज्यादा वक्त लगता है. अन्य दूध से मिलने वाले दही की बनावट ऊंटनी के दूध में नहीं आती है. इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं. जैसे कि ऊंटनी के दूध में के-कैसिइन की बहुत कम मात्रा, प्रोटीन अणुओं के साथ वसा का घनिष्ठ बंधन और नमक की उच्च मात्रा हो सकती है.
उत्तर- ऊंट रिसर्च सेंटर द्वारा विभिन्न डेयरी प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं जैसे- चाय, कॉफी, फ्लेवर्ड मिल्क, फॉर्मेंट दूध, पाश्चुरीकृत दूध, कुल्फी, पनीर, मावा, गुलाब जामुन, बर्फी, रसगुल्ला, पेड़ा और दूध पाउडर आदि. और ये प्रोडक्ट
उत्तर- ऊंटनी का दूध थोड़ा नमकीन होता है. लेकिन इसका स्वाद ऐसा है कि इसे बड़े ही आराम से पिया जा सकता है. दूध में नमकीन स्वाद रेगिस्तान में ऊंट द्वारा खाए जाने वाले पौधों से आ जाता है. नमकीन होने का मौसम से कोई संबंध नहीं है.
ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल
ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2