
जब बात बकरीद के बकरों की होती है तो उसके मानक जरा अलग हट के हैं. बकरा हेल्दी हो और साथ में वजनदार भी हो. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हो जाती है. इसके साथ ये भी जरूरी है कि कुर्बानी के लिए खरीदा जा रहा बकरा दिखने में खूबसूरत भी हो. और अगर गोट एक्सपर्ट की मानें तो इस मामले में बकरों की दो खास नस्ल नंबर एक मानी जाती हैं. हालांकि मानकों को पूरा करने वालीं बकरों की और भी नस्ल हैं, लेकिन कुछ नस्ल ऐसी होती हैं जो एक खास एरिया में ही मिलती हैं.
एक्सपर्ट के मुताबिक बकरों की कुछ खास ऐसी नस्ल रोजमर्रा की सामान्य खुराक से ही 40 से 55 किलो वजन तक की हो जाती हैं. वहीं तीन-चार नस्ल तो 60 किलो और इसके ऊपर तक चली जाती हैं. हालांकि वजनदार बकरे खरीदने के पीछे शौक तो होता ही है, साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कुर्बानी का मीट पहुंचाने की भावना भी होती है.
गोट एक्सपर्ट राशिद का कहना है कि गोहिलवाड़ी नस्ल के बकरे खासतौर पर गुजरात के राजकोट, जूनागढ़, पोरबंदर, अमरेली और भावनगर में पाए जाते हैं. देश में इनकी कम संख्या कम है, इसलिए इस नस्ल के बकरे और बकरियां बहुत ही मुश्किल से मिलते हैं. गोहिलवाड़ी नस्ल का बकरा 50 से 55 किलो वजन तक और बकरी 40 से 45 किलो तक की पाई जाती है. इनका रंग काला होता है और सींग मुड़े हुए मोटे होते हैं.
अलवर, राजस्थान का एक गांव है जखराना के नाम से बकरों की पूरी एक नस्ल है. इस नस्ल के बकरे-बकरियों को जखराना के नाम से जाना जाता है. इस नस्ल को खासतौर पर दूध और मीट के लिए ही पाला जाता है. देखने में जखराना के बकरे ही नहीं बकरियां भी ऊंची और लम्बी-चौड़ी नजर आती हैं. जखराना के बकरे 55 से लेकर 58 किलो वजन तक के तो पाए जाते ही हैं, लेकिन कभी-कभी 60 किलो और उससे ज्यादा वजन तक के भी मिल जाते हैं. बकरी का वजन 45 किलो तक होता है.
ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल
ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2