
बरसात के दौरान आपके बकरे-बकरी खूब जमकर खा रहे हैं. हरा और सूखा चारा समेत दाना और मिनरल्स भी खा रहे हैं. आपको लगेगा कि पेट का हाजमा ठीक है तो जमकर खा रहे हैं. लेकिन कुछ दिन बाद ही ये भी दिखने लगेगा कि जितना खा रहे हैं उसके मुकाबले उनकी ग्रोथ नहीं हो रही है. लगातार कमजोर होते जा रहे हैं. बीमार से दिखने लगेंगे. लेकिन अभी भी खाएंगे जमकर. अगर ऐसा कुछ बकरे-बकरियों में या उनके बच्चों में दिखाई दे तो फौरन ही अलर्ट हो जाएं.
क्योंकि ये मामला पेज के हाजमे से नहीं पेट के कीड़ों से जुड़ा हुआ है. बरसात के दौरान बकरियों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इसमे से कुछ ऐसी बीमारी हैं जिन्हें कुछ उपाय अपनाकर कंट्रोल किया जा सकता है. जैसे पीने के पानी में बदलाव करके भी बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है. वहीं बकरियों की रोजाना की दिनचर्या पर नजर रखी जाए तो बीमारियों को फैलने से पहले ही कंट्रोल किया जा सकता है.
यह जरूरी नहीं कि डॉक्टर के पास ले जाने पर ही बकरी की हर एक बीमारी का पता चलेगा.
बकरी की आंखें देखकर पेट में होने वाले कीड़ों के बारे में पता किया जा सकता है.
बकरी में होने वाले बदलावों को देखकर भी बीमार होने का पता लगा सकते हैं.
भेड़-बकरी में पलने वाले हिमोकस पैरासाइड का पता आंखों से लगाया जा सकता है.
हिमोकस पैरासाइड होते ही भेड़-बकरी की आंखों में बदलाव होने लगता है.
हिमोकस भेड़-बकरी का खून चूसता है जिसका असर आंखों पर होने लगता है.
खून चूसने के चलते हिमोकस पैरासाइड संख्या भी बढ़ने लगती है.
हेल्दी भेड़-बकरी की आंखें चमकीली और लाल-गुलाबी होती हैं.
पेट में हिमोकस है तो आंख हल्की गुलाबी हो जाती है.
हिमोकस की संख्या बढ़ने पर आंख सफेद पड़ने लगती है.
सफेद आंख का मतलब है कि भेड़-बकरी में खून की कमी हो रही है.
बदलती मेंगनी से पता चल जाता है कि बकरी को डायरिया है.
एक हेल्दी बकरी गोल, चमकदार और सॉलिड मेंगनी करती है.
बकरी की चिपकी हुई और गुच्छे वाली मेंगनी का आना बीमारी का अलर्ट है.
मेंगनी पेस्ट जैसी आ रही है तो इसका मतलब बकरी की आंत में इंफेक्शन है.
पेस्ट जैसी मेंगनी बकरी को डायरिया होने पर भी होती है.
बकरी के यूरिन पर भी हर रोज नजर रखनी चाहिए.
बकरी का यूरिन अगर भूरे यानि हल्के पीले रंग का है तो वो सामान्य है.
गहरे पीले रंग का यूरिन आ रहा है तो बकरे-बकरी ने कम पानी पिया है.
कम पानी पीने से बकरी को डिहाइड्रेशन हो जाता है.
यूरिन का रंग गहरा पीला हो और उसमे लालपन हो तो बकरी को यूरिन की जगह चोट लगी है.
अगर कभी यूरिन कॉफी कलर का आने लगे तो समझिए कि बकरी के खून में इंफेक्शन है.
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