
हालांकि बात बहुत मामूली सी लगती है कि गाय-भैंस को खुजली होने से भी दूध उत्पादन घट जाता है. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो खुजली होने पर गाय-भैंस मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशान रहते हैं. और पशुओं के लिए ये परेशानी इतनी बड़ी है कि इसके चलते पशु अपने आप को घायल तक कर लेते हैं और कई बार तो खुजली के चलते गंभीर संक्रमण तक हो जाते हैं. खुजली के चलते ही कई बार पशु में गंभीर रोग भी हो जाते हैं. और पशुओं को खुजली जैसी परेशानी खासतौर पर बरसात के दिनों में बहुत परेशान करती है.
मामूली सी दिखने वाली खुजली भी छोटे-बड़े सभी तरह के पशुओं पर बड़ा असर डालती है. खुजली के चलते ही पशु मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशान रहते हैं. इतना ही खुजली के चलते रोजाना के दूध उत्पादन पर भी इसका असर पड़ता है. यही वजह है पशुओं के डॉक्टर खुजली जैसी बीमारी को मामूली ना समझने की सलाह देते हैं. क्योंकि खुजली के चलते ही कई बार पशु में गंभीर रोग भी हो जाते हैं. खुजली वाली जगह पर घाव तक बन जाता है. खुजली दूर करने के चक्कर में पशु कई बार अपने आप को चोटिल तक कर लेता है.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि पशु छोटा हो जैसे भेड़-बकरी या बड़ा पशु जैसे गाय-भैंस, घोड़ा, याक आदि खुजली की परेशानी सभी को होती है. शरीर के कुछ हिस्सों की खुजली को तो यह सभी छोटे-बड़े पशु खुद से ही दूर करने की कोशिश कर लेते हैं. लेकिन कभी-कभी शरीर के ऐसे हिस्से में भी खुजली होने लगती है जहां जानवर अपने पंजे या पूंछ का इस्तेमाल कर उसे दूर नहीं कर पाता है.
ऐसे में वो जानवर जो खूंटे से बंधा है तो वो वहीं किसी न किसी ऐसी चीज से जो उसके आसपास है अपनी खुजली को दूर करने की कोशिश करता है. वहीं जो जानवर खुला हुआ है वो कभी पेड़ से, कभी दीवार से तो कभी लोहे के तार की बाड़ या फिर जो भी मिल गया उसी से खुजाने की कोशिश करता है. कई बार लोहे के तार या कांटों वाले झाड़ से खुजाने के चलते पशु अपने को घायल भी कर लेता है.
कई बार तो लोहे के तार से जख्म भी हो जाता है और उसी से पशु के शरीर में इंफेक्शन बन जाता है. खुजली जैसी इस परेशानी का असर गाय-भैंस और बकरी के दिमाग पर भी पड़ता है. पशु परेशान रहने लगता है. पशु के खाने-पीने पर भी इसका असर दिखाई देने लगता है. इन्हीं सब कारणों के चलते ही पशु के दूध उत्पादन पर भी इसका असर दिखने लगता है और दूध देना कम कर देता है.
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