
देसी नस्ल की गायों के जब दूध देने की बात होती है तो कई बार बकरियां इस मामले में आगे निकल जाती हैं. क्रास ब्रीड गाय तो और भी ज्यादा पीछे हैं. लेकिन अच्छी खबर ये है कि ज्यादा दूध देने वाली गायों की एक और नस्ल देश को मिली है. ये नस्ल है रोहिलखंडी. हाल ही में रोहिलखंडी गाय को रजिस्टर्ड किया गया है. ये खासतौर पर यूपी में पाई जाने वाली नस्ल है. इसके साथ ही मेलघाटी नस्ल की भैंस भी रजिस्टर्ड की गई है. इस भैंस की खासियत ये है कि दूसरी नस्ल के मुकाबले इस नस्ल की भैंस के दूध में फैट की मात्रा ज्यादा बताई जा रही है.
मेलघाटी नस्ल की भैंस महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में पाई जाती है. अच्छी बात ये भी है कि जिस भैंस के दूध में फैट ज्यादा है उसके मुकाबले मेलघाटी नस्ल की भैंस ज्यादा दूध देती है. गौरतलब रहे हाल ही में राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR), करनाल ने गाय-भैंस, भेड़-बकरी, मुर्गे की नई नस्ल रजिस्टर्ड की हैं.
रोहिलखंडी गाय उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं और पीलीभीत जिलों में पाई जाती है. इनका रंग ज़्यादातर सफ़ेद और ग्रे होता है. इनका चेहरा पतला, सपाट और धंसा हुआ होता है. आंखों की पलकें सफ़ेद होती हैं. सींग ज़्यादातर बाहर की ओर ऊपर मुड़े हुए होते हैं. सींग के सिरे नुकीले होते हैं. पूंछ लंबी होती है. माथा सीधा होता है. उभरे हुआ सिर का ऊपरी हिस्सा पतला, सपाट और धंसा हुआ होता है. बैल अपेक्षाकृत लंबे होते हैं और उनमें वजन खींचने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है. औसत दूध उत्पादन 5.21 किलोग्राम प्रतिदिन है और दूध देने की अवधि औसतन 210 दिन होती है. अनुमानित आबादी लगभग तीन लाख है.
मेलघाटी नस्ल की भैंस महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में पाई जाती है. मेलघाटी का रंग काला और बालदार होता है; इनका माथा चौड़ा (गुंबद के आकार का), चेहरा लंबा और पतला, नाक की हड्डी नुकीली और आंखें उभरी हुई होती हैं. सींग शरीर के समानांतर होते हैं, पीछे की ओर मुड़े हुए और ऊपर, अंदर की ओर नुकीले होते हैं. मेलघाटी भैंस एक दिन में औसतन 4 किलो दूध देती है, और सबसे ज़्यादा दूध उत्पादन 10 किलो प्रतिदिन होता है. दूध में फैट 7 फीसद होता है. इन भैंसों की आबादी लगभग 28 हज़ार है.
दूध देने वाले पशुओं भेड़-बकरी, भैंस और ऊंट समेत सभी पशुओं से ज्यादा देश में रजिस्टर्ड नस्ल गाय की हैं. गायों का कुनबा लगातार तेजी से बढ़ रहा है. साल 2025 तक गायों की रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 51 थी. अभी कुछ दिन पहले ही NBAGR ने गायों की चार और नई नस्ल को इस लिस्ट में शामिल किया है. जिसे मिलाकर गायों की अब रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 55 हो गई है. इन चार नई गायों की खासियत ये है कि ये दूध भी देती हैं तो खेतों में भी काम करती हैं.
इसमे से दो गाय सिंथेटिक नस्ल की हैं. ये सभी गाय यूपी, हरियाणा और झारखंड की हैं.
देश में भैंसों से ज्यादा संख्या गायों की है. गाय के दूध उत्पादन के मामले में भी भारत विश्व में पहले नंबर पर है. गिर, राठी, नागौरी, सहीवाल और ब्रद्री गायों की अव्वल नस्ल में शामिल हैं. कुछ वक्त पहले तक देश में गायों की 41 रजिस्टर्ड नस्ल थीं, जो अब बढ़कर 55 हो गई हैं. भारत कुल दूध उत्पादन में भी विश्व में पहले स्थान पर है.
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