Flies and Mosquitoes: गाय-भैंस को मक्खी-मच्छर से बचाएंगे एनिमल एक्सपर्ट के ये टिप्स, नहीं होंगी बीमारियां 

Flies and Mosquitoes: गाय-भैंस को मक्खी-मच्छर से बचाएंगे एनिमल एक्सपर्ट के ये टिप्स, नहीं होंगी बीमारियां 

Flies and Mosquitoes मक्खी-मच्छर पशुपालन में एक बड़ी परेशानी है. इसके चलते कई तरह की खतरनाक बीमारियां फैलती हैं. लेकिन अब परेशान करने वाली बात ये है कि बीते कुछ वक्त से दवाईयां भी पशुओं पर असर नहीं कर रही हैं. जिसकी बड़ी वजह है परजीवी विरोधी प्रतिरोध (एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस). इसके चलते पशुओं की परजीवी जनित बीमारियों का इलाज करना मुश्किल हो गया है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 30, 2026,
  • Updated Jan 30, 2026, 10:58 AM IST

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गाय-भैंस की बहुत सारी बीमारियों की वजह मक्खी-मच्छर होते हैं. यहां तक की जूनोटिक बीमारियों की वजह भी मक्खी-मच्छर ही होते हैं. गायों की सबसे बड़ी और जानलेवा बीमारी लंपी भी मक्खी-मच्छर की वजह से ही होती है. सालभर में कुछ वक्त ऐसा होता है जब पशुओं के बाड़े में मक्खी-मच्छर का प्रकोप ज्यादा होता है. इन्हें कंट्रोल करने के लिए पशुपालक हर संभव उपाय करते हैं. बाड़े में कुछ दवाईयों का इस्तेमाल भी करते हैं. पशुओं पर भी दवाईयों का स्प्रे किया जाता है. लेकिन कई बार अनजाने में और बिना एक्सपर्ट की सलाह के पशुओं पर ऐसी दवाई का छिड़काव भी कर देते हैं जो बाद में उन्हें नुकसान पहुंचाती हैं. 

इसीलिए पशुपालकों को ये सलाह दी जाती है कि मक्खी-मच्छर से निपटने के लिए हमेशा एक्सपर्ट के बताए टिप्स का ही पालन करें. अभी तक परजीवी रोग (पैरासाइटिक डिसीज) का इलाज दवाईयों से हो जाता था. लेकिन अब परजीवी विरोधी प्रतिरोध (एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस) के चलते पशुओं के डाक्टर भी परेशान हो उठे हैं. लेकिन जब तक इसका कोई नहीं समाधान नहीं आता है तब तक कुछ उपाय अपनाकर इससे बचा जा सकता है.  

 एंटीपैरासिटिक का ओवरयूज है वजह

दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल (ओवरयूज). एंटीपैरासिटिक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल और उस पर कंट्रोल ना होना परजीवियों में प्रतिरोधकता बढ़ने की एक बड़ी वजह है. सही तरह से दवाई ना लेना, पशुओं को सही तरीके से दवाई ना देना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई का पूरा कोर्स ना करना भी एक वजह है. पर्यावरणीय और जैविक कारण भी हैं. परजीवियों की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया और उनके जीन में होने वाले बदलाव भी प्रतिरोधकता का कारण बन रहे हैं.

ऐसे रोक सकते हैं परजीवी रेसिस्टेंस

  • केवल पशु चिकित्सक की सलाह पर ही पशुओं को एंटीपैरासिटिक दवाई खि‍लाएं. 
  • पशुओं के लिए डाक्टर के बताए कृमिनाशक शेडयूल का पालन करें.
  • पशुचिकित्सक द्वारा बताई गई दवाओं के कोर्स को पूरा करें.
  • दवाई की डाक्टर द्वारा बताई गई डोज ही दें, कम या ज्यादा मात्रा ना दें.
  • पशुओं का इलाज नीम-हकीमों से ना करवायें.
  • दवा का इस्तेमाल करने से पहले ड्रग लेबल पर दिए गए निर्देशों को पढ़ लें.
  • एक ही पशु में परजीवी रोधी दवाओं को सालाना बदलें.
  • परजीवी विरोधी प्रतिरोधकता पर शैक्षिक और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दें.
  • अपने फार्म में कृमि नियंत्रण का पूरा रिकॉर्ड रखें.
  • पशुओं में परजीवी नियत्रंण के लिए एथनोवेटरनरी दवाई (ईवीएम) का इस्तेमाल करें.

भूलकर भी ना करें ये काम

डाक्टर के अलावा किसी और की सुझाई गई परजीवी विरोधी दवाई पशुओं को ना खि‍लाएं.
लगातार एक जैसी दवाई पशुओं को ना खि‍लाएं. 
कभी भी पशुओं को खुद से कोई दवाई ना दें.
पशुओं में सामूहिक कृमिनाशन न करें.
खुद के अनुभव के आधार पर स्टोर से दवाई खरीदकर पशुओं को ना खि‍लाएं.

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