Animal Care: बरसात में दूध उत्पादन से लेकर पीने तक से जुड़ी हैं एक्सपर्ट की ये खास बातें 

Animal Care: बरसात में दूध उत्पादन से लेकर पीने तक से जुड़ी हैं एक्सपर्ट की ये खास बातें 

Animal Care डेयरी और एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि डेयरी फार्म और पशु शेड में रोजाना कचरे को साफ करने की आदत पशुओं को बीमारियों से दूर रखती है. साथ ही दूध और दूध से बने प्रोडक्ट भी दूषि‍त नहीं होते हैं. वहीं इस आदत के चलते पशुपालन की लागत भी नहीं बढ़ती है. बीमारी के इलाज पर होने वाला खर्च कम हो जाता है. 

 cow milk fat increase tips cow milk fat increase tips
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 10, 2026,
  • Updated Aug 10, 2026, 11:57 AM IST

बरसात के दिनों में गाय-भैंस का दूध निकालते वक्त साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए. इतना ही नहीं दूध पीते वक्त भी कई उपायों को अपनाना चाहिए. वहीं जिस पशु का दूध निकाला गया है उसे पूरी खुराक मिलना भी बहुत जरूरी है. क्योंकि अक्सर ये देखा गया है कि जैसे ही हम गाय-भैंस का दूध निकालते हैं तो दूध देने के फौरन बाद पशु जमीन पर बैठ जाता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशु के ये लक्षण उसकी कमजोरी के हैं. क्योंकि दूध निकलने के साथ ही पशु के शरीर में कैल्शि यम और फास्फोरस की कमी होने लगती है. इस दौरान कई तरह की बीमारियां पशुओं पर अटैक करती हैं. इसमे सबसे ज्यादा वो होती हैं जो संक्रमण के चलते होती हैं. 

थनैला उसी में से एक खतरनाक बीमारी है. ये भी गंदगी और संक्रमण के चलते ही होती है. बरसात और बाढ़ के बाद संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है. हर छोटी-बड़ी बीमारी पशुओं को चपेट में ले लेती है. इसके चलते दूध भी दूषि‍त होने की संभावना बनी रहती है. इसलिए फार्म और शेड की साफ-सफाई रखने पर बहुत जोर दिया जाता है. अब तो बायो सिक्योरिटी के इस्तेमाल से शेड और फार्म की सफाई बहुत आसान हो गई है. 

क्यों जरूरी है शेड की सफाई

डॉ. सज्जन सिंह, सीनियर साइंटिस्ट, सीआईआरबी, हरियाणा का कहना है कि एनिमल शेड यानि पशु बाड़े का फर्श साफ रहना बहुत जरूरी है. ज्यादातर बीमारियों की वजह फर्श पर फैली गंदगी होती है. इसलिए सुबह-शाम फर्श की साफ-सफाई का खास ख्याल रखें. 

  • फर्श अगर गंदा है तो पशुओं को बीमारी हो सकती है.
  • पशु शेड की जमीन पर बैठता है तो संक्रमण का खतरा बनता है.
  • गंदगी के चलते ही गाय-भैंस को थनैला बीमारी होती है. 
  • एनिमल शेड में गंदगी के चलते मच्छर-मक्खी पनपते हैं. 
  • मच्छर-मक्खी की वजह से गायों को लंपी बीमारी का खतरा बना रहता है.
  • गंदगी के चलते किलनी और चिंचड़ पशुओं के शरीर से चिपकने लगते हैं. 
  • फर्श की गंदगी पशुओं के चारे पर लगती है जिससे पेट में कीड़े होने का खतरा रहता है. 
  • गंदगी के बीच दूध दुहाने से दूध के भी दूषि‍त होने का खतरा रहता है. 

बरसात में ऐसी हो पशुओं की खुराक

  • बरसात के दिनों में हरे चारे की तय मात्रा ही खाने को दें. 
  • हरे चारे संग सूखा चारा भी मिलाकर खि‍लाएं. 
  • पशुओं को कैल्ि मयम और फास्फोरस की बहुत जरूरत होती है.
  • पशुओं की रोजाना की खुराक में मिनरल्स शामिल करें. 
  • मुमकिन हो तो चारे का साइलेज पशुओं को खाने को दें. 
  • साइलेज में नमी न हो, नमी चारे को दूषि‍त कर देती है. 
  • ज्यादा हरा चारा देने से पशुओं को अफरा हो सकता है. 

पानी पिलाने संबंधी जानकारियां 

  • पशुओं को पिलाया जाने वाला पानी साफ-स्वच्छ हो. 
  • जिस बर्तन में पानी पिलाया जाए वो भी साफ होना चाहिए. 
  • अगर पानी की टंकी है तो उसमे चूना कर दें. 
  • टंकी में चूना होने से पानी में दूषि‍त चीजें नहीं होती हैं. 
  • दूषि‍त पानी पीने से पेट में संक्रमण हो जाता है. 
  • पानी दूषित हो तो पशुओं के पेट में कीड़े हो जाते हैं. 

वैक्सीनेशन भी बचाएगा बीमारियों से 

डॉ. सज्जन सिंह ने किसान तक को बताया कि पशुओं को खुरपका-मुंहपका बीमारी से बचाने के लिए जरूरी है कि हर 6 महीने बाद टीका लगवाएं. वहीं गलघोंटू बीमारी से बचाने को हर साल टीका लगवाएं. साथ ही अगर पशु में किसी बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही सरकारी केन्द्र पर रिपोर्ट कर सकते हैं. किसी झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में न पड़ें.

ये भी पढ़ें-

Milk Adulteration: दूध में पानी मिलाया है या पूरा दूध ही सिंथेटिक है, खुद से ऐसे करें जांच 

Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह

MORE NEWS

Read more!