
झींगा एक्सपोर्ट करने वालों की लिस्ट में भारत भी टॉप पर है. भारत से अलग-अलग देशों को करीब 7.5 लाख टन झींगा एक्सपोर्ट किया जाता है. जबकि कुल उत्पादन की बात करें तो 10 लाख टन से भी ज्यादा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मछली की तरह पानी में पलने वाला, लेकिन मछली से अलग झींगा तैयार कैसे होता है. किलो के हिसाब से तैयार होने वाली मछली के मुकाबले कितने ग्राम का झींगा खाने में पसंद किया जाता है. कितने दिन में झींगा खाने लायक तैयार हो जाता है.
झींगा एक्सपर्ट की मानें तो खारी मिट्टी झींगा मछली पालन के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है. इसी तरह के पानी में झींगा उत्पादन तेजी से बढ़ता है. जीवन चक्र पर जाएं तो किसान साल में तीन से चार बार झींगा तैयार कर बाजार में बेच सकता है. हालांकि बीते कुछ महीनों में यूएस, जापान, ईयू और रूस भारतीय झींगा के कंसाइनमेंट लौटा चुके हैं.
झींगा हैचरी एसोसिएशन के अध्यक्ष आंध्रा प्रदेश निवासी रवि कुमार येलांकी ने किसान तक को बताया कि वैसे तो देश ही नहीं विदेशों के बाजार में हर तरह के साइज वाले झींगा की डिमांड है. जैसे चीन और अमेरिका की बात करें तो यहां झींगा की बहुत खपत है. यहां बड़े साइज का झींगा ज्यादा खाया जाता है.
अगर छोटे साइज जैसे 14 से 15 ग्राम की बात करें तो इसकी सबसे ज्यादा डिमांड है. एक किलो वजन में यह 60 से 70 पीस आ जाते हैं. नौ ग्राम का झींगा भी बाजार में मांगा जाता है. लेकिन इसकी डिमांड ज्यादा नहीं है. वैसे तो इसके रेट विदेशी बाजारों के चलते चढ़ते और उतरते रहते हैं. लेकिन अभी 350 से 360 रुपये के आसपास ही चल रहे हैं.
रवि कुमार येलांकी ने बताया कि 14-15 ग्राम वजन वाला झींगा तालाब में 70 से 80 दिन में तैयार हो जाता है. अगर झींगा पालन में किसी भी तरह की कमी रह भी जाती है तो ज्यादा से ज्यादा 90 दिन में तो हर हाल में तैयार हो ही जाएगा. इसके अलावा अगर बड़े साइज का झींगा तैयार करना है तो ज्यादा से ज्यादा चार महीने में तैयार हो जाएगा. इस तरह से एक साल में झींगा की तीन से चार बार तक फसल तैयार की जा सकती है.
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