Dairy Farmer: महाराष्ट्र के 19 जिलों में NDDB की मदद से पशुपालकों को ऐसे मिल रहा चारा

Dairy Farmer: महाराष्ट्र के 19 जिलों में NDDB की मदद से पशुपालकों को ऐसे मिल रहा चारा

Dairy Farmer विदर्भ के 11 जिलों और मराठवाड़ा के आठ जिलों के पशुपालकों को महाराष्ट्र में एक खास योजना का फायदा दिया जा रहा है. योजना के तहत पशुपालकों को गाय-भैंस और हरा चारा दिया जा रहा है. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की मदद से महाराष्ट्र सरकार इस योजना को चला रही है. 

पशुओं को खिलाएं ये हरा चारापशुओं को खिलाएं ये हरा चारा
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 22, 2026,
  • Updated May 22, 2026, 8:00 AM IST

महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में गाय-भैंस पालन वाले पशुपालकों के अच्छे दिनों की शुरुआत हो गई है. सूखे के चलते अभी तक जहां पशुओं के लिए हरा चारा एक बड़ी परेशानी था, वहीं आज पशु भरपेट हरा चारा खा रहे हैं. इतना ही नहीं छोटे और गरीब पशुपालकों को हरे चारे समेत गाय-भैंस भी बोनस में मिल रहे हैं. और ये सब मुमकिन हो रहा है राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की मदद से. महाराष्ट्र सरकार पशुपालकों को एनडीडीबी की मदद से कई बड़ी योजनाओं को पशुपालकों तक पहुंचा रही है. एनडीडीबी के साथ इस काम में मदर डेयरी भी सरकार की मदद कर रही है. 

महाराष्ट्र के खास जरूरतमंद 19 जिलों में राष्ट्रीय डेयरी विकास परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत के मौके पर पशुपालकों के लिए कई बड़ी योजनाओं की शुरुआत की गई थी. योजना के तहत पशुपालकों को गाय-भैंस, चारा, पशुपालन में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी भी दी जा रही है. 

आत्महत्यों वाले इलाकों में मिल रहीं सुविधाएं 

योजना के तहत पशुपालकों को साल के 12 महीने मिलने वाले चारा उत्पादन के लिए सब्सिडी दी जा रही है. साथ ही इलेक्ट्रिक चारा काटने वाली मशीन और साइलेज का वितरण किया जा रहा है. उत्पादकता और इनकम बढ़ाने के लिए किसानों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन पद्धतियों से अवगत कराने के लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है. इन योजनाओं का फायदा महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा के पशुपालकों को खासतौर पर दिया जा रहा है.

गौरतलब रहे ये इलाके किसानों की आत्महत्याओं के लिए कुख्यात हैं. सरकार को उम्मीद है कि दूध व्यवसाय से इन इलाकों में कृषि संकट को दूर करने और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में मदद मिलेगी. 
इस योजना के तहत इस बात का भी खास ख्याल रखा जाएगा कि किसानों को ज्यादा दूध देने वाली गाय और भैंसें मिलेंगी, साथ ही दूध में वसा और एसएनएफ (ठोस-वसा रहित) की मात्रा बढ़ाने के लिए एनिमल ब्रीडिंग स्प्लीमेंट और डाइट एडिटिव्स भी दिए जाएंगे. 

सरकार कर रही डेयरी किसानों की मदद 

केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार (जीओआई) की राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) योजना के तहत चलाई जा रही कृत्रिम गर्भाधान (एआई) परियोजना में मराठवाड़ा क्षेत्र के किसानों को गुणवत्तापूर्ण एआई सेवाएं देने के लिए 273 एआई केंद्र बनाए गए हैं. एआई केंद्रों ने अब तक पारंपरिक वीर्य का इस्तेमाल करके करीब दो लाख एआई और सेक्स सॉर्टेड सीमन का इस्तेमाल करके 12024 एआई किए हैं. इन एआई से अब तक क्षेत्र में 20,979 आनुवंशिक रूप से बेहतर बछड़ों ने जन्म लिया है.

दूध का लाभकारी मूल्य प्रदान करने और दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए तकनीकी इनपुट देने के लिए एनडीडीबी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड (एमडीएफवीपीएल) परिचालन क्षेत्र में नांदेड़ जिले के 247 गांव शामिल हैं. दूध संग्रह के बुनियादी ढांचे में 187 दूध पूलिंग पॉइंट, 15 बल्क मिल्क कूलर और एक मिल्क चिलिंग सेंटर शामिल किया गया है. 

महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि मराठवाड़ा क्षेत्र में डेयरी को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार साल 2023-24 और 2024-25 के दौरान “दुधारू पशुओं की आपूर्ति” को लागू कर रही है. केंद्र प्रायोजित योजना के तहत महाराष्ट्र राज्य सरकार के साथ साझेदारी में मंत्रालय द्वारा विभिन्न पशु रोगों का टीकाकरण किया जा रहा है.

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