
‘केन्द्र सरकार समेत हर राज्य सरकार पोल्ट्री को बढ़ावा देती है. इससे राज्य में रोजगार के मौके भी बढ़ते हैं और अंडे-चिकन की डिमांड भी पूरी हो जाती है. इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकारें लोन पर सब्सि डी देती हैं. युवाओं को पोल्ट्री की ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता भी दी जाती है. ये सरकारों का एक अच्छा कदम है. लेकिन इसके साथ ही खासतौर से कुछ राज्यों में मीट बंदी लागू हो जाती है. कभी एक दिन के लिए तो कभी पूरे एक महीने यानि 30 दिन के लिए. ऐसे में अंडा-चिकन पोल्ट्री फार्म पर रखे रह जाते हैं और उनकी बिक्री नहीं हो पाती है. जब 30 दिन प्रोडक्ट नहीं बिकेगा तो बैंक की किस्त कैसे निकलेगी.
मजबूरी में पोल्ट्री फार्मर डिफाल्टर घोषित हो जाते या पोल्ट्री फार्म पर ताला लग जाता है. माननीय ये ऐसे तो नहीं चल पाएगा.’ ये कहना है पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) के प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा का. उनका कहना है कि जल्द ही पीएफआई का प्रतिनिधि मंडल पीएम, केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री और वाणिज्य मंत्री से मिलेगा. उनसे मांग की जाएगी कि मीट और पोल्ट्री प्रोडक्ट की बिक्री का कैलेंडर बनाया जाए. जिससे कारोबार करने में कोई परेशानी न हो.
रनपाल ढांढा ने किसान तक को बताया कि किसी भी त्यौहार और धार्मिक आयोजन के मौके पर स्थानीय पुलिस-प्रशासन का आदेश आते ही शहरभर की मीट-चिकन की दुकानें बंद करा दी जाती हैं. जिसके चलते करोड़ों रुपये का कारोबार एक झटके में थम जाता है. दिहाड़ी लेबर से लेकर कारोबारी तक को नुकसान उठाना पड़ता है. सरकार को भी रेवेन्यू का नुकसान उठाना पड़ता है. कई जगह तो मीट की चपेट में अंडा भी आ जाता है. इसी के चलते हम लोग जल्द ही पीएम नरेन्द्र मोदी, मंत्री डॉ. एसपी सिंह बघेल और पीयूष गोयल से मिलने जा रहे हैं.
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