
पीआईबी (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) की ओर से जारी की गई एक खबर के मुताबिक देश में झींगा उत्पादन 10 लाख टन को भी पार कर गया है. ये खुशखबरी ऐसे वक्त में आई है जब भारी-भरकम टैरिफ की चर्चाओं के बीच रोजाना झींगा के भविष्य को लेकर बातें हो रही हैं. झींगा के बारे में ये खुशखबरी सिर्फ उत्पादन बढ़ने के बारे में ही नहीं है, बल्कि अमेरिकी डिमांड की परवाह न करते हुए झींगा की एक्सपोर्ट डिमांड भी बढ़ी है. झींगा पालकों के लिए ये बड़ी खुशखबरी है कि झींगा का उत्पादन और विदेशी डिमांड दोनों ही बढ़ रहे हैं.
एक्वाइंडिया 2026 नाम से हुए कार्यक्रम में सोसाइटी ऑफ एक्वाकल्चर प्रोफेशनल्स ने ये जानकारी दी है. झींगा एक्सपर्ट का कहना है कि वन्नामेई झींगा के साथ ही ब्लैक टाइगर झींगा का भी खूब उत्पादन हुआ है. अच्छी बात ये है कि ब्लैक टाइगर की डिमांड भी विदेशों में बढ़ रही है. वहीं झींगा का एक्सपोर्ट 5.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर चुका है.
पीआईबी के मुताबिक देश में झींगा उत्पादन 11 लाख टन को पार कर गया है. कुछ वक्त पहले तक ये 8.5 से 9 लाख टन के बीच में था. लेकिन साल 2025-26 के झींगा उत्पादन के आंकड़ों की बात करें तो वन्नामेई झींगा का उत्पादन 10.5 लाख टन पर पहुंच गया है. जबकि ब्लैक टाइगर ने अच्छी वापसी करते हुए 66500 अन के आंकड़े को छुआ है. वहीं पोस्ट-लार्वा स्टॉकिंग का आंकड़ा भी अच्छा है. देश में स्टॉकिंग आंकड़ा 990000 टन के पार पहुंच गया है. इसके चलते आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में लगातार विस्तार देखने को मिल रहा है.
2026 की शुरुआत के एक्सपोर्ट आंकड़े बताते हैं कि झींगा का एक्सपोर्ट पैटर्न बदल रहा है. जनवरी में कुल एक्सपोर्ट करीब 50 हजार टन रहा था, जो बीते साल की तुलना में मामूली सा ही ज्यादा था. लेकिन झींगा निर्यात वित्त वर्ष 2025-2026 की बात करें तो झींगा एक्सपोर्ट ने रिकॉर्ड 5.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को छू लिया है. वहीं अगर कुल सीफूड एक्सपोर्ट को देखें तो एक्सपोर्ट में जमे हुए (फ्रोजन) झींगा का हिस्सा दो-तिहाई से ज्यादा रहा है. और ये तब है जब अमेरिकी टैरिफ का लगातार दबाव बाजार पर बना हुआ था.
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