बंगाल में नए नियमों से ठप हुआ पशु व्यापार, परेशान किसान और व्यापारी बोले- अब घर कैसे चलेगा?

बंगाल में नए नियमों से ठप हुआ पशु व्यापार, परेशान किसान और व्यापारी बोले- अब घर कैसे चलेगा?

पश्चिम बंगाल में मवेशियों की खरीद-बिक्री और वध से जुड़े नए नियमों के बाद पशु बाजारों में सन्नाटा छा गया है. छोटे किसान, डेयरी मालिक और व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि नए नियमों और सर्टिफिकेट प्रक्रिया के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है और रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है.

पशुपालकों की बढ़ी टेंशनपशुपालकों की बढ़ी टेंशन
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 21, 2026,
  • Updated May 21, 2026, 8:19 AM IST

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले में इन दिनों पशुपालकों और व्यापारियों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है. राज्य सरकार की ओर से मवेशियों की खरीद-बिक्री और वध को लेकर नए और सख्त नियम लागू किए गए हैं. इन नियमों का असर गांवों में रहने वाले छोटे किसानों, डेयरी मालिकों और पशु व्यापारियों पर साफ दिखाई दे रहा है. लोग अब इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनका घर कैसे चलेगा और बच्चों की पढ़ाई का खर्च कैसे उठेगा.

पशु बाजारों में छाया सन्नाटा

पूर्व बर्दवान जिले के कई पशु बाजार अब लगभग खाली दिखाई दे रहे हैं. जहां पहले हर हफ्ते लाखों रुपये का कारोबार होता था, वहां अब न गाय दिख रही है और न ही व्यापारी. समुद्रगढ़ के बिबीरहाट बाजार में हर बुधवार को बड़ा पशु बाजार लगता था, लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है. व्यापारियों का कहना है कि नए नियमों के डर से लोग मवेशियों की खरीद-बिक्री करने से बच रहे हैं.

छोटे किसानों के सामने आर्थिक संकट

गांवों में रहने वाले कई परिवार गाय और भैंस पालकर अपना जीवन चलाते हैं. वे दूध बेचते हैं और जब पशु बूढ़े हो जाते हैं या दूध देना बंद कर देते हैं, तो उन्हें बेचकर कुछ पैसे कमा लेते हैं. लेकिन अब नए नियमों के कारण यह आसान नहीं रह गया है. सरकार ने 14 साल से कम उम्र के पशुओं के वध पर रोक लगा दी है. साथ ही 14 साल से ज्यादा उम्र के पशुओं के लिए सरकारी सर्टिफिकेट जरूरी कर दिया गया है.

कई पशुपालकों का कहना है कि कुछ गाय और भैंसें 14 साल की उम्र से पहले ही बीमार हो जाती हैं और दूध देना बंद कर देती हैं. ऐसे पशुओं का इलाज कराना भी आसान नहीं है, क्योंकि गांवों में अच्छे पशु डॉक्टर और अस्पतालों की कमी है. ऐसे में किसानों के सामने रोजाना पशुओं को खिलाने-पिलाने का खर्च बढ़ता जा रहा है.

व्यापारियों को भ्रष्टाचार का डर

व्यापारियों का कहना है कि अब पशुओं को बेचने के लिए सरकारी कागज और सर्टिफिकेट बनवाने पड़ेंगे. उन्हें डर है कि इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार बढ़ सकता है और गरीब लोगों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है. कई व्यापारियों ने यह भी कहा कि अगर व्यापार पूरी तरह बंद हो गया, तो उनके सामने भूखे रहने जैसी स्थिति आ सकती है.

त्योहार से पहले बढ़ी परेशानी

कुछ दिनों बाद बकरी ईद का त्योहार आने वाला है. यह समय पशु व्यापारियों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान बाजारों में काफी खरीद-बिक्री होती है. लेकिन इस बार नए नियमों की वजह से व्यापारी खुश नहीं हैं. उनका कहना है कि इस बार त्योहार से पहले ही उनका व्यापार लगभग बंद हो गया है.

प्रशासन से मदद की मांग

स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि नियम तो जरूरी हैं, लेकिन ऐसे नियम बनने चाहिए जिनसे गरीब लोगों की रोजी-रोटी पर असर न पड़े. वहीं ‘बांगिया वक्फ बचाओ मंच’ ने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर पशुपालकों की मदद और लोगों की सुरक्षा की मांग की है.

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