मार्च खत्म होने में 15 दिन बचे हैं. उसके बाद अप्रैल शुरू होते ही तापमान बढ़ने के साथ ही गर्म हवाएं चलना भी शुरू हो जाएंगी. तापमान बढ़ने पर भीषण गर्मी और गर्म हवाओं का ये सिलसिला जून तक जारी रहेगा. ये वो मौसम होता है जब इंसानों संग पशु भी बैचेन होने लगते हैं. गर्मी के चलते पशु तनाव में आ जाते हैं. उत्पादन घटने के साथ ही बीमार भी होने लगते हैं. गोट एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे में सभी पशुओं को खास देखभाल और खुराक की जरूरत होती है.
खासतौर पर बकरे-बकरियों को भी मौसम के मुताबिक खुराक की जरूरत होती है. बकरे-बकरियों के लिए ये बहुत ही नुकसान पहुंचाने वाला मौसम होता है. एक्सपर्ट का कहना है कि मई-जून में हवाएं बहुत खुश्क चलती हैं जिससे शरीर का पसीना जल्दी सूख जाता है और शरीर का तापमान बढ़ने लगता है.
गर्मी-लू से बचाने को करें ये काम
- गर्मी के दौरान पानी सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व है. इसलिए इस मौसम में भेड़-बकरियों को भरपूर मात्रा में साफ और ठंडा पानी पिलाएं. धूप में रखा हुआ पानी ना दें.
- गर्मी के दिनों में भेड़-बकरियों को रात में खाना खिलाएं. भूसे की मात्रा कम कर दें और दाना मिश्रण की मात्रा बढ़ा दें, हरा और मुलायम चारा दें. साथ ही भेड़-बकरियों को चारे में 100 ग्राम सोडियम बाइका र्बोनेट और 100 ग्राम तेल भी दें.
- इस मौसम में भेड़ -बकरी कम चारा खायेगी इसलिए पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए उसके दाना मिश्रण में ऊर्जा और प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें. इसके लिए कोई भी अनाज जैसे गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा 40 किलो, चोकर या चूरी 37 किलो और कोई भी खाली 20 किलो लेकर उसमें एक किलो सादा नमक और 2 किलो विटामिन मिनरल मिक्सचर मिला लें.
- भेड़-बकरियों के शेड में गर्मी से बचाव के पूरे इंतजाम करें. जैसे फर्राटा पंखे लगा दें. भेड़-बकरियों के ऊपर पानी में भीगी टाट पट्टी डाल दें जिससे ठंडक बनी रहे.
- भेड़ों को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए जरूरत होने पर शरीर से ऊन उतरवाते रहें.
- पशुओं को सूखी तूड़ी 30 फीसद और हरा चारा 70 फीसद तक खिलाएं.
- भेड़-बकरियों को चराने के लिए सुबह जल्दी या शाम को देर से बाहर निकाले दोपहर के समय चरागाह में गहरी छाया वाला पेड़ देखकर भेड़-बकरियों को आराम करवाना चाहिए.
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