
बकरी पालकों के लिए गोट एक्सपर्ट की एक खास और बड़ी सलाह है. हो सकता है ये सुनने में आपको अटपटा लगे, लेकिन ये सच है कि गर्मी के मौसम में बकरी के बच्चे निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं. और निमोनिया के दौरान होने वाली जरा सी भी लापरवाही जानलेवा हो जाती है. लेकिन बकरी पालक सोच रहे होंगे कि निमोनिया तो सर्दियों में होता है, लेकिनि ऐसे लोग ये जान लें कि गर्मी में भी निमोनिया होता है. और इसका सबसे बड़ा कारण होता है चढ़ता तापमान.
जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है तो निमोनिया का खतरा बढ़ता जाता है. एक्सपर्ट का कहना है कि जब बकरियों के बच्चों में निमोनिया होता है तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है. बुखार आने लगता है. इतना ही नहीं उनकी नाक भी बहने लगती है. किसान इन लक्षणों को अच्छी तरह से पहचानते हैं. इसलिए लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें.
गोट एक्सपर्ट का कहना है कि जब गर्मियां शुरू होती हैं तो तापमान अचानक तेजी के साथ बढ़ने लगता है. ऐसे मौसम में खासतौर पर बकरी के बच्चे अपने को उस मौसम में नहीं ढाल पाते हैं. जिसके चलते वो निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं. निमोनिया शुरू होते ही उन्हें बुखार आने लगता है, नाक बहती है और सांस लेने में परेशानी होती है. जैसे ही यह लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही डॉक्टर के पास ले जाएं. जब तक डॉक्टर दवाई खिलाने की कहे तो बकरी के बच्चे को लगातार बिना गैप के उसे दवाई खिलाएं.
निमोनिया से बचाव के लिए गोट एक्सपर्ट का कहना है कि गर्मी शुरू होते ही सबसे पहले तो बकरी पालक को बकरियों के आवास में बदलाव करना चाहिए. बकरियों के शेड को इस तरह से ढक दें कि उसमे गर्म हवाएं आसानी से न आएं. दूसरा यह कि दोपहर एक बजे से चार बजे तक बकरियों और उनके बच्चों को चराने न ले जाएं. सुबह और शाम में ही बकरियों को चराने ले जाएं.
पानी खूब पिलाएं. ध्यान रहे कि मौसम के चलते पानी गर्म न हो. क्योंकि गर्मी के मौसम में बकरियों के चरने के वक्त में कमी आ जाती है तो उन्हें शेड में ही भरपूर चारा दें. कोशिश करें कि इस दौरान बकरियों और उनके बच्चों को पूरा न्यूट्रिशन दें. इसके लिए चाहें तो पैलेट्स फीड भी खिला सकते हैं.
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