Moringa for Goats: बकरियों को पूरे साल मिलेगा ये हरा चारा, जून में बुवाई की अभी से कर लें तैयारी 

Moringa for Goats: बकरियों को पूरे साल मिलेगा ये हरा चारा, जून में बुवाई की अभी से कर लें तैयारी 

Moringa for Goats बकरी पालन में हरा चारा अहम रोल निभाता है. लेकिन कौनसा हरा चारा बकरे-बकरियों को खाने के लिए दिया जाना चाहिए. ऐसा कौनसा हरा चारा है जो साल के 12 महीने आसानी से और सस्ता मिल सकता है. क्योंकि हरा चारा आज बकरी और भेड़ पालक सभी के लिए परेशानी बना हुआ है. बीते कई साल से हरा चारा गर्मियों ही नहीं सर्दी और बरसात के मौसम में भी परेशानी बना हुआ है. 

सहजन के पौधों के लिए खतरनाक कीटसहजन के पौधों के लिए खतरनाक कीट
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 06, 2026,
  • Updated May 06, 2026, 3:53 PM IST

बकरी पालन में मीट के लिए बकरे तैयार किए जाते हैं तो दूध और ब्रीडिंग के लिए बकरियां. बकरी पालक ही यही कोशि‍श होती है कि बच्चे बड़े होकर ज्यादा और पौष्टिबक दूध देने वाली बकरी बने. बिना किसी परेशानी के साल में दो बार बच्चे दे दें. वहीं अगर बकरा है तो उसकी ग्रोथ तेजी से और हेल्दी हो, जिससे उसके मीट के अच्छे दाम मिलें. और ये सब मुमकिन होता है बकरे-बकरियों को दी जाने वाली अच्छी खुराक से. गोट एक्सपर्ट की मानें तो अच्छी खुराक के लिए पौष्टि क हरा चारा खि‍लाना बहुत जरूरी है. और अगर हरे चारे में बकरे-बकरियों को मोरिंग खाने को मिल जाए तो फिर कहने ही क्या.

मोरिंग की बुवाई जून में होने लगती है, लेकिन उसके लिए मई से ही तैयारी करनी होती है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के साइंटिस्ट का कहना है कि एक पेड़ का हरा चारा ऐसा है जो साल के 12 महीने मिलता है. अच्छी बात ये है कि इस पेड़ के पत्ते से लेकर तने तक को बकरे-बकरी बड़े ही चाव से स्वाद ले-लेकर खाते हैं. बकरे-बकरियों को भी दाने और सूखे चारे के साथ हरे चारे की जरूरत होती है.

जून में मोरिंगा लगाने कि अभी करें तैयारी 

फोडर एक्सपर्ट डॉ. एसके अहमद का कहना है कि मोरिंगा को लगाने का सही वक्त जून है. हालांकि बरसात के दिनों में भी इसे लगाया जा सकता है. लेकिन अभी से लगाने की तैयारी कर लें तो जून में आसानी से इसे लगाया जा सकता है. अगर इसकी खासियत की बात करें तो मोरिंगा में बड़ी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. इसके साथ ही दूसरे जरूरी मिनरल्स और विटामिन भी इसके अंदर बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं.

और दूसरे हरे चारे के मुकाबले प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स के मामले में यह बहुत ही पौष्टिक है. इसकी एक और सबसे बड़ी खास बात ये कि थोड़ी सी देखभाल के बाद प्राकृतिक तरीके से ये बहुत तेजी से बढ़ता है. इसके उत्पादन के लिए किसी भी तरह के केमिकल की जरूरत भी नहीं होती है. इसलिए इसे प्राकृतिक रूप से ऑर्गेनिक भी कहा जा सकता है.  

पत्ते और तने तक को कर सकते हैं इस्तेमाल 

डॉ. एसके अहमद ने बकरे-बकरियों को मोरिंगा खि‍लाने के बारे में बताया कि मोरिंगा के तने को भी बकरी खाती है. क्योंकि इसका तना बहुत ही मुलायम होता है. इसकी पत्तियों को भी बकरे और बकरी बड़े ही चाव से खाते हैं. अगर आप चाहें तो जिस वक्त खूब उत्पादन हो रहा हो तो पहले बकरियों को पत्तियां खिला सकते हैं. इसके तने को अलग रखकर उसके पैलेट्स बना सकते हैं. पैलेट्स बनाने का अपना एक अलग खास तरीका है. ऐसा करके आप गर्मी और बरसात के लिए भी चारे का इंतजाम कर के रख सकते हैं.  

ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल

ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2

MORE NEWS

Read more!