पशुपालन खासतौर से गाय-भैंस को हमेशा से दूध कारोबार से जोड़कर ही देखा जाता है. कई मायनों में ये सच है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि गाय-भैंस के बछड़ों से होने वाले मुनाफे को दरकिनार कर दिया जाए. खासतौर पर भैंस के नर बछड़े की बाजार में खासी डिमांड रहती है. लेकिन पशुपालक नर बछड़े पर इसलिए ध्यान नहीं देते हैं कि इससे दूध उत्पादन तो होगा नहीं, इसलिए इस पर लागत खर्च करना बेकार ही है. जबकि हकीकत ये है कि मीट की डिमांड के चलते नर बछड़ों की बहुत डिमांड रहती है. मीट एक्सपोर्ट के लिए एक साल की उम्र तक के बछड़ों की डिमांड साल के 12 महीने रहती है.
एनिमल एक्सपर्ट की भी मानें तो रीप्रोडक्शन (प्रजनन) पशुपालक के मुनाफे का एक बड़ा सोर्स है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि किसी भी मौसम में बच्चा होते ही उसकी खास देखभाल करनी होती है. देखभाल में अगर जरा सी भी लापरवाही हुई तो बच्चे की जन्म के साथ ही मौत भी हो जाती है. और अगर देखभाल अच्छी तरह से की तो बच्चा छह महीने का होते ही मुनाफा देने वाला बन जाता है.
जन्म होते ही गाय-भैंस के सामने रखें
- जन्म के फौरन बाद बच्चे को ज्यादातर भैंस के सामने रखें.
- बच्चा सामने होने पर भैंस उसे चाटकर साफ करती है.
- बच्चे को चाटने से उसकी त्वचा जल्दी सूख जाती है.
- भैंस द्वारा बच्चे को चाटने पर उसके शरीर का तापमान नहीं गिरता है.
- चाटने से बच्चे का शरीर साफ हो जाता है खून दौड़ने लगता है.
- चाटने से भैंस और बच्चे के बीच दुलार बढ़ता है.
- बच्चे को चाटने से भैंस को सॉल्ट और प्रोटीन मिलता है.
- भैंस बच्चे को नहीं चाटती है तो उसे साफ तौलिए से रगड़ दें.
जन्म होते ही इन बातों का रखें ख्याल
- जन्म लेते ही बच्चे के ऊपर से जेर-झिल्ली हटा दें.
- बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो तो उसकी छाती की मालिश कर दें.
- ठीक से सांस ना आने पर बच्चे की पिछली टांगें पकड़ कर उल्टा लटकाएं.
- नये ब्लेड या गर्म पानी में साफ की गई कैंची से बच्चे की नाल काट दें.
- जिस जगह से नाल काटी गई है वहां टिंचर आयोडीन लगा दें.
- जन्म लेने के एक-दो घंटे के अंदर बच्चे को भैंस की खीस जरूर पिलाएं.
- बच्चे को खीस पिलाने के लिए भैंस की जेर गिरने का इंतजार ना करें.
- बच्चे को वक्त से पिलाया गया खीस बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.
- बच्चे को उसके वजन का 10 फीसद दूध पिलाना चाहिए.
- बच्चे को सुबह-शाम दो बार में दूध पिलाना चाहिए.
- पहला दूध पीने के बाद बच्चे का दो घंटे के अंदर गोबर करना जरूरी है.
- बच्चे को सर्दी से बचाने के संसाधनों का इंतजाम करें.
- 10 दिन की उम्र पर बच्चे को पेट के कीड़ों की दवा जरूर पिला दें.
- पेट के कीड़ों की दूसरी खुराक बच्चे को 21 दिन की उम्र पर पिलाएं.
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