Water for Animal: पशुओं के लिए जानलेवा है शरीर में पानी की कमी, ऐसे करें पहचान

Water for Animal: पशुओं के लिए जानलेवा है शरीर में पानी की कमी, ऐसे करें पहचान

Water for Animal पशु के बीमार होने पर दूध उत्पादन कम हो जाता है. बीमारी पर इलाज में पैसा भी खर्च करना पड़ता है. गर्मियों में पानी की कमी के चलते पशुओं को सबसे बड़ी डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रैस जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है. गर्मी में पशुओं के लिए साफ और ताजा पानी पीना बहुत जरूरी है. पानी ना पीने पर किस तरह की परेशानी हो सकती है.

dairy farmdairy farm
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 06, 2026,
  • Updated May 06, 2026, 12:01 PM IST

गर्मियों में पशुओं को चारे की कमी हो जाए तो एक बार को चलेगा, लेकिन अगर पीने के पानी की कमी होती है तो ये उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन की परेशानी होने लगती है. और यही छोटी सी दिखने वाली परेशानी कई बार जानलेवा हो जाती है. इसलिए ये बहुत जरूरी है कि जैसे हम पशुओं के चारे का ख्याल रखते हैं तो उसी तरह से गर्मियों में पीने के पानी का भी ख्याल रखा जाए. एक्सपर्ट के मुताबिक पशुओं को हरा चारा खूब खि‍लाना चाहिए. 

एक किलो हरे चारे से पशु में तीन से चार लीटर तक पानी की कमी पूरी हो जाती है. अगर पानी पिलाने में जरा सी भी कोताही बरती गई तो 40 से 45 डिग्री वाले तापमान, लू वाली तेज गर्म हवाएं और हीट स्ट्रैस के चलते उत्पादन तो घटेगा ही साथ में पशुओं की जान पर भी बन आएगी. और एक बार अगर दुधारू पशु बीमार पड़ गया तो फिर एक नहीं कई तरह से पशुपालक को नुकसान उठाना पड़ता है. 

पशुओं में पानी की कमी लक्षण 

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है. 

पशु को कम पानी पिलाने के नुकसान 

पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे चारा खाने और उसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. शरीर के जरूरी पोषक तत्वा मल-मूत्र के जरिए बाहर निकलने लगते हैं. पशुओं की दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ने लगता है. खून गाढ़ा होने लगता है. बछड़े और बछड़ियों को पेचिस लग जाती है. बड़े पशुओं को दस्त लग जाते हैं

ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल

ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2

MORE NEWS

Read more!