Goat Lamb Care: जन्म से लेकर 20 दिन का होने तक ऐसे करनी है बकरी के बच्चों की देखभाल 

Goat Lamb Care: जन्म से लेकर 20 दिन का होने तक ऐसे करनी है बकरी के बच्चों की देखभाल 

Goat Lamb Care बकरी पालन में बच्चों की देखभाल से जुड़े एक्सपर्ट टिप्स का पालन किया जाए तो बच्चों की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है. अगर एनिमल एक्सपर्ट के बताए उपायों पर ध्यान देकर बकरी के बच्चों की देखभाल की गई तो आप बकरी के बाड़े में ना सिर्फ मृत्यु दर को कम कर लेंगे बल्कि पूरी तरह से रोक भी सकते हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 20, 2026,
  • Updated Jan 20, 2026, 12:52 PM IST

हालांकि री-प्रोडक्शन (प्रजनन) का महत्व सभी तरह के पशुपालन में है. गाय-भैंस में भी हैं. लेकिन भेड़-और बकरियों में इसका ज्यादा महत्व है. गोट एक्सपर्ट की मानें तो बकरी और भेड़ पालन में सबसे ज्यादा मुनाफा बच्चों से ही होता है. जितने ज्यादा बच्चे होंगे उतना ही मुनाफा होगा. इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि गाय-भैंस में मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा दूध उत्पादन से मिलता है. जबकि भेड़-बकरियों में ऐसा नहीं है. इसीलिए केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि जन्म से लेकर 20 दिन का होने तक भेड़-बकरियों के बच्चों की खास तरह से देखभाल करनी चाहिए. इसमे उन्हें दी जाने वाली खुराक भी शामिल है. पशुपालकों की कुछ लापरवाही के चलते भेड़-बकरियों के बच्चों की मृत्यु दर बढ़ने लगती है. जिसका पशुपालकों को खासा नुकसान उठाना पड़ता है. 

लेकिन बहुत छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर जन्म लेने वाले बच्चों की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है. बकरी पालन मीट और दूध दोनों के लिए किया जाता है. लेकिन दोनों में ही मुनाफे के लिए ये जरूरी है कि बकरी साल में दो बार जो दो-दो बच्चे देती है वो जिंदा रहें. क्योंकि खासतौर पर मीट के लिए छह-छह महीने की उम्र वाले बच्चों के अच्छे दाम मिलना शुरू हो जाते हैं. वहीं एक साल का होने पर बच्चे देने के साथ ही दूध के लिए तैयार हो जाते हैं. 

जन्म लेते ही ऐसे करें बच्चे की देखभाल

गोट एक्सपर्ट इकबाल मोहम्मद का कहना है कि बकरी के बच्चों की मृत्यु् दर कम करने के लिए ये जरूरी है कि हम उसकी देखभाल के साथ ही उसके खानपान का भी ध्यान रखें. उम्र के साथ उसका वैक्सीनेशन भी कराएं. 

  • बच्चे के पैदा होते ही उसे मां का दूध पिलाएं.
  • बच्चे के वजन के हिसाब से ही उसे दूध पिलाएं. 
  • वजन एक किलो हो तो 100-125 ग्राम दूध पिलाएं. 
  • बच्चे को दिनभर में तीन से चार बार में दूध पिलाएं. 
  • दूध पिलाने के लिए बकरी की जैर गिरने का इंतजार ना करें.
  • बच्चा 18 से 20 दिन का हो तो चारे की कोपल खि‍लाएं. 
  • बच्चा एक महीने का हो जाए तो पिसा हुआ दाना खि‍लाएं. 

बच्चे की देखभाल के लिए जरूरी हैं ये टिप्स 

अगर आप साइंटीफिक तरीके से बकरी पालन कर रहे हैं तो फिर बकरी अपने शेड में अक्टूबर-नवंबर में बच्चा देगी या फिर मार्च-अप्रैल में. ये मौसम का वो वक्त है जब ना तो ज्यादा गर्मी होती है और ना ही ज्यादा सर्दी. बावजूद इसके बकरी के बच्चे को उचित देखभाल की जरूरत होती है. 

  1. बच्चे को मौसम से बचाने के लिए जरूरी उपाय पहले से ही कर लें. 
  2. जमीन पर बिछावन के लिए पुआल का इस्तेमाल करें.
  3. तीन महीने का होने पर बच्चे का टीकाकरण शुरू करा दें.
  4. डॉक्टर की सलाह पर पेट के कीड़ों की दवाई दें.
  5. जन्म से एक-डेढ़ महीने पहले बकरी की खुराक बढ़ा दें. 
  6. बकरी को भरपूर मात्रा में हरा, सूखा चारा और दाना खाने को दें.

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