Feed and Shed: गाय-भैंस गर्भवती है तो ऐसी होनी चाहिए उसकी खुराक और शेड 

Feed and Shed: गाय-भैंस गर्भवती है तो ऐसी होनी चाहिए उसकी खुराक और शेड 

Feed and Shed भैंस का गर्भकाल 310 से 315 दिन तक का होता है. गर्भकाल का हर एक दिन बहुत खास होता है. खासतौर पर भैंस की हैल्थ को लेकर. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर गर्भकाल के दौरान भैंस की अच्छी तरह से देखभाल की तो बच्चा तो हेल्दी मिलेगा. इतना ही नहीं भैंस भी तंदुरुस्त रहेगी और खूब दूध भी देगी.

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 04, 2026,
  • Updated May 04, 2026, 3:06 PM IST

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गर्भवती गाय-भैंस को हेल्दी रखने के लिए जितनी जरूरी उसकी देखभाल है, उससे कहीं ज्यादा उसकी खुराक और शेड पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है. गाय-भैंस को ज्यादा देखभाल की जरूरत कब होती है, कब गाय-भैंस गर्भवती हो रही है, इसका पता ऐसे भी लगाया जा सकता है कि हर 21 दिन बाद भैंस हीट में आती है. और जब दोबारा से भैंस हीट में न आए तो समझ जाएं कि भैंस गर्भ से है. वैसे तो आमतौर पर तभी से गाय-भैंस की देखभाल शुरू हो जानी चाहिए. क्योंकि जिस गाय-भैंस की गर्भकाल के दौरान अच्छी तरह से देखभाल होती तो दूध के साथ बच्चा भी हेल्दी मिलेगा. इतना ही नहीं भैंस भी तंदुरुस्त रहेगी. 

वक्त से ज्यादा दूध उत्पादन और हेल्दी बच्चा मिलने से पशुपालन की लागत भी कम होती है. वहीं वक्त से गाय-भैंस का दुग्धकाल भी शुरू हो जाएगा. गर्भकाल के दौरान भैंस की देखभाल कैसे की जाए, ये जानकारी लेने के लिए केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी), हिसार की बेवसाइट की मदद भी ली जा सकती है. सीआईआरबी गर्भवती भैंस की शेड, खानपान और हैल्थ से जुड़ी देखभाल के बारे में हर तरह की जानकारी देता है.  

खानपान में भूलकर भी न करें ये कमी  

  • खानपान की कमी से बच्चा कमजोर और अंधा पैदा हो सकता है. 
  • बच्चा देने के बाद भैंस को मिल्क फीवर हो सकता है.
  • भैंस फूल दिखा सकती है और जेर रूक सकती है.
  • भैंस की बच्चेदानी में मवाद पड़ सकता है. 
  • बच्चा देने के बाद दूध उत्पादन घट सकता है.

गर्भवती गाय-भैंस के लिए ऐसे तैयार करें शेड 

  • आठवें महीने के बाद से भैंस को दूसरे पशुओं से अलग रखना चाहिए. 
  • भैंस का बाड़ा उबड़-खाबड़ तथा फिसलन वाला नहीं होना चाहिए.
  • बाड़ा हवादार और भैंस को सर्दी, गर्मी और बरसात से बचाने वाला हो.
  • बाड़े में रेत-मिट्टी का कच्चा फर्श हो और सीलन न हो.  
  • ताजा पीने के पानी का इंतजाम होना चाहिए.

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