Goat Farming: सस्ता और आसान है बकरी पालन, मीट-दूध से खूब होता मुनाफा, पढ़ें डिटेल 

Goat Farming: सस्ता और आसान है बकरी पालन, मीट-दूध से खूब होता मुनाफा, पढ़ें डिटेल 

गडवासु यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. इन्द्रजीत सिंह के मुताबिक बकरी का दूध नेचुरल ऑर्गेनिक है. और ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि बकरी के चरने का तरीका दूसरे पशुओं से अलग है. वो एक बार की खुराक में हर तरह का हरा चारा खाती है. 

बकरियों को खिलाएं ये चाराबकरियों को खिलाएं ये चारा
नासि‍र हुसैन
  • NEW DELHI,
  • Nov 04, 2024,
  • Updated Nov 04, 2024, 12:06 PM IST

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बकरी पालन पशुपालन में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. पशुपालन लोन के लिए आने वाले आवेदन में भी 80 फीसद बकरी पालन के लिए होते हैं. इस बारे में एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि बकरी पालन आज सबसे सस्ता और आसान है. ये कम से कम जगह और लागत में शुरू हो जाता है. दूसरा ये कि इससे मुनाफा भी खूब होता है. आज बाजार में बकरे के मीट के साथ-साथ बकरी के दूध की डिमांड भी लगातार बढ़ रही है. 

कई बड़ी बीमारियों में तो बकरी का दूध इस्तेमाल करने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं. आज गांव ही नहीं शहर में भी बकरी पालन बढ़ रहा है. सरकारी बकरी पालन ट्रेनिंग सेंटर में भी 8वीं पास से लेकर बीए, एमबीए, इंजीनियरिंग, पीएचडी आदि की डिग्री लेकर लोग कोर्स करने आ रहे हैं. इसमे आर्मी, पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स समेत सरकारी विभागों के बड़े अफसर भी होते हैं. 

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जानें क्यों सस्ता और आसान है बकरी पालन करना 

  • चारे का इंतजाम करने में परेशानी नहीं होती. बकरियां गाय-भैंस के मुकाबले 20 चारा खाती हैं.  
  • बकरी और इंसानों की खुराक में कोई समानता नहीं है इसलिए लागत कम आती है. जैसे पोल्ट्री फीड में शामिल मक्का-सोयाबीन इंसान भी खाते हैं.  
  • सबसे ज्यादा मुनाफा बकरी के बच्चों से होता है. बकरी एक बार में दो से चार त‍क बच्चे देती है. 
  • बकरी शरीर से एक मजबूत पशु है, दूसरे पशुओं के मुकाबले कम बीमारी लगती हैं, जिससे लागत कम हो जाती है. 
  • बकरी का दूध आसानी से पचने और मेडिशन वैल्यू वाला होता है. 
  • बकरी के दूध से आने वाली अजीब से गंध को भी कंट्रोल कर लिया गया है. 
  • बकरी के दूध में अमीनो एसिड जैसे हिस्टिडीन, एस्पार्टिक एसिड, फेनिलएलनिन और थ्रेओनीन होते हैं. वहीं खनिज जैसे सोडियम, आयरन, कॉपर, विटामिन जैसे विटामिन ए, निकोटिनिक एसिड और कोलीन भरपूर मात्रा में होते हैं.
  • बकरी की खाल उच्च गुणवत्ता वाली होती है, जैसे ब्लैक बंगाल बकरी की खाल दुनिया में सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली मानी जाती है. 
  • बकरे का मीट बहुत स्वादिष्ट, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है.
  • पहाड़ी इलाकों में पलने वाली बकरी के बाल जैसे पश्मीना और मोहायर की कीमत बहुत ज्यादा है.  
  • बकरी के मल-मूत्र में एनपीके की मात्रा ज्यादा होती है, इसका इस्तेमाल खेत में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए किया जाता है.
  • बकरियों को रखने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती है. कम जगह में और दूसरे पशुओं के साथ आराम से रह लेती हैं. 
  • जमीन पर जगह कम हो तो अच्छी ग्रोथ के साथ बकरियों को छत पर भी पाला जा सकता है.
  • जरूरी नहीं है कि बकरियों को खुले में चराने के लिए ले जाया जाए. 
  • बकरियों की ज्यादातर नस्ल अब स्टॉल फीड पर ही पल जाती हैं.
  • पालने के लिए  बकरियां आसानी से मिल जाती हैं. गाय-भैंस के मुकाबले सस्ती भी होती हैं. 
  • बकरियों की 39 नस्ल हैं जो हर तरह के मौसम में पल जाती हैं. 
  • दूध-मीट और ब्रीडिंग के लिए बकरियां पालकर मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है. 

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