Cow-Buffalo Care: गर्मी में गाय-भैंस को बीमारियों से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Cow-Buffalo Care: गर्मी में गाय-भैंस को बीमारियों से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Cow-Buffalo Care मौसम के चलते बीमार होने वाले पशु कम दूध देने की हालत में भी चारा सामान्य दिनों के जितना ही खाता है. ऐसे में पशुपालक को पशु की बीमारी पर खर्च करने के साथ ही पूरी खुराक भी खिलानी होती है. जबकि दूध उत्पादन ना के बराबर रह जाता है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर वक्त रहते कुछ जरूरी उपाय कर लें तो पशुपालक परेशानी और आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 09, 2026,
  • Updated May 09, 2026, 8:20 AM IST

गर्मियों में चढ़ता तापमान, तपिश भरी धूप, गर्म हवाओं के थपेड़े. खासतौर पर मई-जून के दो महीने ऐसे ही होते हैं. ये जितने इंसानों के लिए खराब माने जाते हैं, तो उतने भी पशुओं यानि गाय-भैंस के लिए जानलेवा कहे जाते हैं. इस मौसम के हिसाब से बहुत सारी बीमारियां भी पशुओं पर अटैक करती हैं. दिनभर चलने वाली लू के हिसाब से गाय-भैंस के लिए ये मौसम बहुत खतरनाक माना जाता है. गाय-भैंस का हीट स्ट्रेस में आना और डिहाइड्रेशन जैसी परेशानी भी इसी मौसम में देखने को मिलती है.

जिसका सीधा असर गाय-भैंस के दूध उत्पादन पर पड़ता है. यही वजह है कि एनिमल एक्सपर्ट बदलते मौसम के हिसाब से पशुओं के शेड में बदलाव करने, पीने के पानी और चारे में बदलाव करने की सलाह देते हैं. इतना ही नहीं पशु को शेड से कब बाहर ले जाना है या फिर कब से कब तक शेड में ही रखना इसका पालन भी एक्सपर्ट के मुताबिक ही करने की सलाह दी जाती है.  

गर्मीऔर लू में ऐसे करें देखभाल

  • गाय-भैंस के हीट में आने पर वक्त रहते गाभिन कराएं. 
  • पशु को दोपहर के वक्ते सीधे तौर पर तेज धूप से बचाएं. 
  • खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीके लगवाएं.
  • डॉक्टर की सलाह पर पशु पेट के कीड़ों की दवाई खिलाएं.
  • गेहूं के भूसे की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए उसमे यूरिया मिलाएं. 
  • पशु का दूध निकालने के बाद पशु के थन कीटाणु नाशक घोल में डुबोकर साफ करें.
  • दुधारू पशुओं को थैनेला रोग से बचाने के लिए डाक्टर की सलाह लें. 
  • सुबह-शाम गर्भवती और बीमार पशु को टहलाने ले जाएं.
  • पशुओं को साफ और ताजा पानी पिलाएं, ठंडा पानी ना दें.
  • सुबह-शाम को पशु को ताजा पानी से नहला दें. 
  • पशुओं का बाड़ा हवादार होना चाहिए.
  • बाड़े में रेत-मिट्टी का कच्चा फर्श हो. 
  • बाड़े में सीलन नहीं होनी चाहिए. 
  • बछड़े को बैल बनाने के लिए छह महीने की उम्र पर बधिया करा दें.
  • पशुओं को अफरा होने पर 500 ग्राम सरसों तेल के साथ 50 ग्राम तारपीन का तेल दें.
  • पशु की सेहत और दूध बढ़ाने के लिए 50-60 ग्राम मिनरल मिक्चर दें. 
  • हरे चारे की कमी दूर करने को गेहूं कटते ही ज्वार, मक्का, लोबिया की बुआई करें.

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