FMD-EL Nino: अल नीनो के असर से जानलेवा नहीं होगा एफएमडी रोग करें ये काम 

FMD-EL Nino: अल नीनो के असर से जानलेवा नहीं होगा एफएमडी रोग करें ये काम 

FMD-EL Nino देश में हर साल करीब 50 करोड़ पशुओं को एफएमडी की वैक्सीन लगाई जा रही है. कई राज्यों में तो छठे और सातवें चरण का टीकाकरण चल रहा है. देश के 9 राज्यों को एफएमडी फ्री जोन बनाने की तैयारी चल रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा डेयरी और मीट सेक्टर को मिलेगा. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 24, 2026,
  • Updated Jun 24, 2026, 2:07 PM IST

अल नीनो का असर पशुओं के उत्पादन ही नहीं उनकी बीमारियों पर भी देखने को मिल सकता है. ये कहना है कि एनिमल एक्सपर्ट का. एक्सपर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है कि डॉक्टर की सलाह लेते हुए पशुओं का वैक्सीनेशन करा दें. अल नीनो और मौसम में बदलाव को देखते हुए वैक्सीन के टाइम टेबल में भी बदलाव किया जा सकता है, लेकिन ये सब होगा डॉक्टर की सलाह पर. लेकिन इसका फायदा ये होगा कि पशुओं की जो गंभीर बीमारियां हैं वो पशुओं के लिए जानलेवा नहीं बनेंगी. जैसे खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी. ये बीमारी खासतौर पर मॉनसून में जल्दी फैलती है. अल नीनो के असर से बारिश कम और गर्मी ज्यादा तेज पड़ेगी. 

ऐसा माना जा रहा है कि ऐसे ही मौसम में एफएमडी बीमारी और ज्यादा सक्रिीय होती है. दूध उत्पादन में हमारा देश नंबर वन है, मीट उत्पादन में भी बहुत अच्छी संभावनाएं हैं, बावजूद इसके डेयरी एक्सपोर्ट में हम बहुत पिछड़े हुए हैं. मीट एक्सपोेर्ट की बात करें तो आज भी विश्व के कई बड़े देश हमारे यहां का बफैलो मीट नहीं खरीदते हैं. क्योंकि हमारे पशुओं के बीच से एफएमडी बीमारी खत्म नहीं हुई है.  

ये होते हैं एफएमडी के लक्षण 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि एफएमडी पीड़ित किसी भी पशु जैसे गाय-भैंस और भेड़-बकरी के लक्षण ये हैं कि उन्हें 104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा. भूख कम हो जाएगी. पशु सुस्त रहने लगता है. मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है. मुंह में फफोले हो जाते हैं. खासतौर पर जीभ और मसूड़ों पर फफोले बहुत ज्यादा हो जाते हैं. पशु के पैर में खुर के बीच घाव हो जाते हैं, जो अल्सर होता है. गाभिन पशु का गर्भपात हो जाता है. थन में सूजन और पशु में बांझपन की बीमारी आ जाती है. 

इन 5 कारण फैलता है एफएमडी      

दूषित चारा और दूषित पानी पीने से पशुओं में एफएमडी रोग जल्दी फैलता है. बरसात के दौरान खासतौर पर पशु खुले में चरने के दौरान दूषित चारा-पानी खा और पी लेते हैं. खुले में पड़ी कुछ सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है. फार्म पर नए आने वाले पशु से भी ये बीमारी लग जाती है. पहले से ही एफएमडी से पीड़ित पशु के साथ रहने से भी हो जाती है. 

एफएमडी की रोकथाम के टिप्स 

पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है. इसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन कराएं. उसके कान में ईयर टैग डलवाएं. किसी भी पशु स्वास्य्ले केन्द्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के टीके लगवाएं. टीका लगवाने के बाद इस बात का खास ख्याल रखें कि टीका लगने पर 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. इसलिए तब तक पशु का खास ख्याल रखें. बरसात के दौरान पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

एफएमडी होने पर ऐसे करें इलाज 

एफएमडी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी उपाय जरूर अपनाए जा सकते हैं. जैसे पीड़ित पशु को बाकी सभी पशुओं से अलग रखें. मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट सॉल्यूशन से धोएं. इसके अलावा बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर उससे पशु के मुंह की सफाई करें. खुर के घावों को पोटेशियम सॉल्यूगशन या बेकिंग सोडा से धोएं. कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं.

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